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    Home»ज़रा हटके

    …फिर छिड़ी बहस मोहनजोदड़ो से जुड़ी सिंधु घाटी सभ्यता की विशेषताओं पर

    ShagunBy ShagunJune 6, 2025 ज़रा हटके No Comments7 Mins Read
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    मोहनजोदड़ो, जिसका अर्थ सिन्धी भाषा में “मृतकों का टीला” है, सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख केंद्र है। यह प्राचीन शहर, जो वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना जिले में सिंधु नदी के तट पर स्थित है, लगभग 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व के बीच फला-फूला। यह विश्व की सबसे प्राचीन और उन्नत नगरीय सभ्यताओं में से एक मानी जाती है, जिसकी खोज 1922 में पुरातत्ववेत्ता राखालदास बनर्जी ने की थी। जावेद अख्तर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में इस सभ्यता की प्रशंसा करते हुए इसे मेसोपोटामिया, मिस्र और सुमेरिया से भी उन्नत बताया, जिसने इसके प्रति लोगों की जिज्ञासा को और बढ़ा दिया। बता दें कि जावेद अख्तर ने “The Lallantop” के खास शो ‘बैठकी’ में सिंधु घाटी सभ्यता और मोहनजोदड़ो की प्रशंसा की। यह पॉडकास्ट 29 मई 2025 को प्रसारित हुआ था।

    क्या सच में मोहनजोदड़ो की सभ्यता इतनी नायाब थी, क्या रहस्य थे इसके, लोग आज भी इसे क्यों पसंद करते हैं किसने बसाया था इसे और क्या मकसद था इसका! आज हम इसी विषय में जानेंगे।

    मोहनजोदड़ों एवं हड़प्पा- सिंधु घाटी सभ्यता का नायाब रत्न: यह थीं अनूठी विशेषताएं

    मोहनजोदड़ो को दुनिया का सबसे पुराना नियोजित शहर माना जाता है। इसकी नगरीय योजना और सैनिटेशन प्रणाली आज भी इंजीनियरों और पुरातत्वविदों को आश्चर्यचकित करती है। मोहनजोदड़ो सिंधु नदी के पश्चिम में लरकाना जिले, सिंध, पाकिस्तान में सिंधु नदी और घग्गर-हकरा नदी के बीच एक केंद्रीय स्थान पर स्थित है। यह सिंधु नदी घाटी के बाढ़ के मैदान के बीच में एक प्लेइस्टोसिन रिज पर स्थित है, जो लरकाना शहर से लगभग 28 किलोमीटर दूर है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं:

    उन्नत नगर नियोजन: मोहनजोदड़ो की सड़कें ग्रिड प्रणाली पर आधारित थीं, जो समकोण पर एक-दूसरे को काटती थीं। सड़कों के दोनों ओर पक्की ईंटों से बने घर थे, जिनके दरवाजे गलियों की ओर खुलते थे, न कि मुख्य सड़कों की ओर। यह गोपनीयता और सुरक्षा का प्रतीक था। प्रत्येक घर में स्नानघर और जल निकासी की व्यवस्था थी, जो एक केंद्रीय नालियों के जाल से जुड़ी थी।

    प्राचीन सैनिटेशन प्रणाली: जावेद अख्तर ने ठीक ही कहा कि मोहनजोदड़ो की जल निकासी प्रणाली उस समय की अन्य सभ्यताओं से कहीं अधिक उन्नत थी। प्रत्येक घर में शौचालय और स्नानघर थे, जो ढकी हुई नालियों से जुड़े थे। प्रसिद्ध “महास्नानघर” (Great Bath), जो 40 फीट लंबा और 25 फीट चौड़ा है, जलरोधक ईंटों और डामर से निर्मित था। यह संभवतः धार्मिक या सामाजिक अनुष्ठानों के लिए उपयोग होता था। कुछ साल पहले आई बाढ़ में भी इस प्रणाली ने पानी को 12 घंटे में निकाल दिया, जो इसकी इंजीनियरी की उत्कृष्टता को दर्शाता है।

    सामाजिक समानता: मोहनजोदड़ो में कोई भव्य राजमहल या विशाल धार्मिक मंदिर नहीं मिले, जो इस सभ्यता को “लो-प्रोफाइल” बनाता है। यह समाज केंद्रित था, न कि राजा या धर्म केंद्रित। पुरातत्वविदों का मानना है कि यहाँ का शासन बुद्धि और सामाजिक अनुशासन पर आधारित था, न कि ताकत पर। अजायबघरों में मिले अवशेषों में हथियारों की कमी और कला से युक्त वस्तुएं, जैसे मूर्तियाँ, मुहरें, और आभूषण, इसकी सौंदर्य-प्रियता को दर्शाते हैं।

    कला और संस्कृति: मोहनजोदड़ो से प्राप्त “नृतकी” की कांस्य मूर्ति और “पशुपति” की मुहर इस सभ्यता की कलात्मक और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं। पशुपति की मुहर पर एक योगी जैसी आकृति, जिसके चारों ओर जानवर हैं, कुछ विद्वानों को शिव से जोड़ती है, हालांकि यह विवादास्पद है। मिट्टी के बर्तनों, खिलौनों, और सूक्ष्म लिपि वाली मुहरें इसकी तकनीकी और सौंदर्यबोध की गवाही देती हैं।

    pic: courtesy by Google

    मोहनजोदड़ो के रहस्य

    मोहनजोदड़ो कई अनसुलझे रहस्यों का केंद्र है, जो इसे और भी आकर्षक बनाते हैं:

    लिपि का रहस्य: सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि, जिसमें 400 से अधिक चिह्न हैं, आज तक पढ़ी नहीं जा सकी। यह लिपि छोटी और संक्षिप्त है, जो इसे डीकोड करने में चुनौतीपूर्ण बनाती है। कुछ विद्वान इसे प्रोटो-द्रविड़ियन या प्रोटो-संस्कृत से जोड़ते हैं, लेकिन कोई ठोस प्रमाण नहीं है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 2021 में इस लिपि को डीकोड करने वाले को 1 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी, ताकि इसकी भाषा और संस्कृति को समझने में मदद मिले।

    पतन के कारण: मोहनजोदड़ो और सिंधु घाटी सभ्यता का पतन (लगभग 1900 ईसा पूर्व) एक रहस्य है। जलवायु परिवर्तन, नदी के मार्ग में बदलाव, बाढ़, या व्यापार में कमी जैसे कारण सुझाए गए हैं। कुछ सिद्धांतों में आक्रमण या बीमारी की भी बात है, लेकिन कोई पुख्ता सबूत नहीं है।

    धार्मिक और सामाजिक संरचना: मोहनजोदड़ो में मंदिरों की अनुपस्थिति और पशुपति मुहर जैसे अवशेष यह सवाल उठाते हैं कि क्या यह सभ्यता धार्मिक थी या धर्मनिरपेक्ष। कुछ विद्वान इसे प्रारंभिक हिंदू धर्म, जैन धर्म, या बौद्ध धर्म से जोड़ते हैं, लेकिन मुख्यधारा के इतिहासकार इसे अस्वीकार करते हैं, क्योंकि इसके ठोस प्रमाण नहीं हैं।

    किसने बसाया और क्या था मकसद?

    मोहनजोदड़ो और हड़प्पा को संभवतः स्थानीय द्रविड़ियन या प्रोटो-द्रविड़ियन समुदायों ने बसाया था, जो सिंधु और घग्घर-हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) नदियों के किनारे रहते थे। इसका मकसद व्यापार, कृषि, और सामाजिक संगठन को बढ़ावा देना था। यह सभ्यता मेसोपोटामिया, अफगानिस्तान, और ईरान के साथ व्यापार करती थी, जिसके प्रमाण वहाँ मिली हड़प्पाई मुहरों से मिलते हैं। इसकी नगरीय संरचना और मानकीकृत माप-तौल प्रणाली एक सुनियोजित और समृद्ध समाज की गवाही देती है।

    लोग इसे आज क्यों पसंद करते हैं?

    मोहनजोदड़ो की सभ्यता आज भी लोगों को आकर्षित करती है वजह यह है क्योंकि:

    1. आधुनिकता का प्रतीक: इसकी सैनिटेशन और नगर नियोजन प्रणाली आधुनिक शहरीकरण से तुलनीय है।
    2. रहस्यमयी पहलू: इसकी लिपि और पतन के कारणों का अनसुलझा रहना इसे रोमांचक बनाता है।
    3. सांस्कृतिक गौरव: यह भारत और दक्षिण एशिया की प्राचीन विरासत का प्रतीक है, जो UNESCO विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
    4. सामाजिक समानता: इसका समाज-केंद्रित ढांचा और राजमहलों की अनुपस्थिति इसे एक समतामूलक समाज के रूप में प्रस्तुत करता है, जो आज के समय में भी प्रेरणादायक है।

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का इनाम

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 2021 में कीलड़ी पुरातात्विक स्थल की खुदाई के संदर्भ में सिंधु घाटी की लिपि को डीकोड करने वाले को 1 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की। इसका उद्देश्य द्रविड़ संस्कृति और सिंधु सभ्यता के बीच संभावित संबंधों को उजागर करना है, क्योंकि कुछ विद्वान मानते हैं कि यह लिपि प्रोटो-द्रविड़ियन हो सकती है। यह पहल इस सभ्यता के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    मोहनजोदड़ो फिल्म ने मचाया था तहलका :

    “मोहनजोदड़ो” (2016) एक भारतीय हिंदी भाषा की पीरियड एक्शन-एडवेंचर फिल्म है, जिसका लेखन और निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया। यह फिल्म प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता, विशेष रूप से मोहनजोदड़ो शहर (UNESCO विश्व धरोहर स्थल) पर आधारित है, जो अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित है। फिल्म में ऋतिक रोशन और पूजा हेगड़े मुख्य भूमिकाओं में हैं, और यह विश्व की पहली सिनेमाई प्रस्तुति है जो इस सभ्यता को दर्शाती है। फिल्म का फिल्मांकन भुज, मुंबई, बेड़ाघाट (जबलपुर), और थाणे में शूट किया गया था। फिल्म में मोहनजोदड़ो की विशालता, बाजारों में विदेशी व्यापारी, और सैनिटेशन सिस्टम को दर्शाया गया है। “महास्नानघर” (Great Bath) और शहर की सड़कों को भव्य रूप से चित्रित किया गया। जानकार बताते हैं कि इस फिल्म को बनाने में ही फिल्म का आधा बजट हीरो के रूप में खत्म हो गया था, ऋतिक रोशन ने इस फिल्म में मुंह मांगी कीमत लगभग 50 करोड़ ली थी। फिल्म ने बाद में 58 करोड़ का बिज़नेस किया था।

    वास्तव में कहा जाये तो मोहनजोदड़ो न केवल एक पुरातात्विक स्थल है, बल्कि मानव सभ्यता की प्रगति का प्रतीक है। इसकी उन्नत इंजीनियरी, सामाजिक समानता, और कलात्मक समृद्धि इसे विश्व की सबसे नायाब सभ्यताओं में से एक बनाती है। जावेद अख्तर का बयान इस सभ्यता की महानता को फिर से रेखांकित करता है। हालांकि, इसकी लिपि और पतन के कारण आज भी रहस्य बने हुए हैं, और तमिलनाडु सरकार की इनाम की घोषणा जैसे प्रयास इसे समझने की दिशा में नई उम्मीद जगाते हैं। यह सभ्यता हमें यह सिखाती है कि प्राचीन समाज भी आधुनिकता और समानता की मिसाल हो सकते हैं। – प्रस्तुति : नीतू सिंह

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