जागरूकता के अभाव में भी हो रही हैैं डॉल्फिन की हत्याएं?

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ऐसी ही एक घटना प्रतापगढ़ में घटी जिसका वीडियो वायरल हुआ, तीन आरोपी गिरफ्तार

बेजुबान और मासूम जानवरों पे भी मानव के अत्याचार कम नहीं हो रहे। ऐसी कुछ बहुत ही दु:खद घटनाएं तो व्यापक रूप से सबके सामने आ जाती हैं और ऐसी कई घटनाएं सिर्फ घटित होकर वहीं दफ़न हो जाती हैं।

ऐसी ही एक दु:खद और मार्मिक घटना दु:खदायी वर्ष के अंतिम दिन उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कोथरिया गांव में घटित हुई।

राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित मासूम सी डाल्फिन कुछ ग्रामीणों का शिकार हो गई। कुछ आधा दर्जन ग्रामीणों ने उसे बहुत ही दर्दनाक तरीके से मौत के घाट उतार दिया। इनकी संख्या कम होने की वजह से इन्हें सरकार संरक्षित कर योजनाएं भी चला रही है। लेकिन डॉल्फिन का नदी से इलाहाबाद जल शाखा की शारदा सहायक नहर पर आ जाना उसकी जान के लिए काल बन गया।

वायरल वीडियो से जाहिर होता है कि ग्रामीणों ने जैसे ही एक नये जीव को नहर में देखा अचंभित और थोड़ा अंजाने भय से भयभीत भी हुए। किसी ने डॉल्फिन के मारे जाने का वीडियो भी शूट कर के सोशल मीडिया में वायरल किया। जिसके चलते तीन आरोपी गिरफ्तार किये गये अन्य कुछ आरोपियों की खोज जारी है।

वीडियो में यह घटना देखने पर ऐसी लग रही है कि ग्रामीणों को डाल्फिन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। की वह जीव राष्ट्रीय जीव संरक्षण में है। इस मामले में जागरूकता की कमी साफ-साफ दिख रही है। वो आनन-फानन में बस मार रहे हैं। इतनी निर्दयता क्यों? कुछ अभ्यस्त शिकारी व व्यापारी इन मासूमों का शिकार चोरी छिपे करते हैं और इनसे प्राप्त तेल का व्यापार चोरी छिपे करते हैं। जैव विविधता के लिए और गंगा नदी के पारिस्थितिक तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने के लिए इनका होना बहुत जरुरी है।

एक तथ्य यह भी :

डॉल्फिन स्तनधारी जीव है जो सिटेसिया समूह का एक सदस्य है। आम बोलचाल की भाषा में इसे सोंस और संसू व गंगा की गाय के नाम से भी जाना जाता है। इनकी संख्या में लगातार कमी को देखते हुए 5 अक्टूबर 2009 को केंद्र सरकार ने डॉल्फिन को संरक्षित करने की दृष्टि से इसे राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया है। संबंधित विभाग इनके संरक्षण के लिए जागरुकता को लेकर कागजी खेल करते चले आ रहे हैं। अगर इन ग्रामीणों तक डॉल्फिन से संबंधित जागरूकता की किरण पहुंचती तो शायद इस मासूम जीव की दर्दनाक तरीके से हत्या न की गयी होती और संख्या में बहुत कम बचीं डॉल्फिन में एक संख्या और कम न होती।

इस राष्ट्रीय जलीय प्राणी की हत्या के दोषी मात्र आरोपी ग्रामीण नहीं हैं। दोषी वो लोग भी हैं जिन्हें इस जीव के संरक्षण का जिम्मा मिला हुआ है। जागरूकता फैलाने का काम अगर सही मायने में होता तो इन ग्रामीणों से अनजाने में ये महापाप न होता।

डॉल्फिन संरक्षण के हों समुचित प्रयास:

राष्ट्रीय जलीय जीव को सही मायने में बचाने का एक स्वस्थ तरीका जागरूकता ही है जो जमीनी तौर पर होनी चाहिए। सोशल मीडिया भारत के कोने-कोने तक अपनी पहुंच बना चुका है। इसके ही माध्यम से बहुत कम लागत में डाल्फिन संरक्षण से संबंधित जागरूकता फैलाई जा सकती है। इस जागरूकता में दो अहम बिंदु जरूर जोड़े जा सकते हैं, एक मार्मिक अपील जिसमें बताया जाये इनकी संख्या कितनी कम हैं और इन्हें बचाना हमारे लिए कितना आवश्यक है। दूसरा यह की इनको नुकसान पहुंचाने पर किस तरह के दण्ड हैं।

सोशल मीडिया पर जबरदस्त उबाल:

माधव बाजा : जैसे इन लोगो का डॉल्फिन मारते हुए वीडियो बनाया गया है वैसे ही इनलोगो को मारते हुए वीडियो बनाया जाना चाहिए…तभी रुकेंगे ये राक्षस की औलादें..। दुर्भाग्य पूर्ण की हम इंसान है।

प्रशांत भारती: हमसे देखा नहीं जा रहा हैं,लोग कैसे जीवों को मार देते है। क्या बिगाड़ा इसने किसी का।

हुक्का पानी : इस गंगा डॉलफिन को तो संरक्षण प्राप्त है फिर कैसे खुलेआम यह लड़के मार रहे हैं कृपया तुरंत कार्रवाई करें।

तुम प्रकृति को मार रहे हो और नेचर भी तुमसे गिन गिन कर बदले ले रही है ! ऐसे ही चलता रहा तो 2021 में दुनिया की आधी आबादी प्रकृति के श्राप से अल्लाह को प्यारी हो जाएंगी! बहरहाल अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया है जिन्होंने मात्र अपने मजे के लिए एक डॉल्फिन को मार दिया!

इस गंगा डॉल्फिन की वजह से ही तो प्रूव किया गया की गंगा का जल निर्मल हो रहा है, क्योंकि यह सबसे ज्यादा संवेदनशील प्राणी है. यह भारतीय डॉल्फिन गंगा में पाई जाती है और इसकी आंखें नहीं होती.

प्रतापगढ़ पुलिस: उक्त घटना दिनांक 31.12.2020 की है, इस सम्बन्ध में मुकदमा पंजीकृत कर 03 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, अन्य विधिक कार्यवाही की जा रही है।

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