नई दिल्ली, 5 अगस्त 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक सनसनीखेज बयान दिया है। मंगलवार को सीएनबीसी के ‘स्क्वॉक बॉक्स’ को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, “मैं अगले 24 घंटों में भारत पर लागू टैरिफ में भारी बढ़ोतरी करने जा रहा हूँ।” यह बयान भारत और अमेरिका के बीच पहले से चले आ रहे व्यापारिक तनाव को और गहरा सकता है। ट्रंप ने भारत को “खराब व्यापारिक साझेदार” करार देते हुए आरोप लगाया कि भारत अमेरिका के साथ असंतुलित व्यापार करता है और रूस से तेल खरीदकर वैश्विक स्थिरता को नुकसान पहुंचा रहा है।
ट्रंप की चेतावनी : यूक्रेन में संघर्ष को बढ़ावा
ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भारत को टारगेट करते हुए कहा था कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है और उसे बाजार में बेचकर फ़ायदा उठा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इससे रूस की “युद्ध मशीन” को वित्तीय सहायता मिल रही है, जो यूक्रेन में संघर्ष को बढ़ावा दे रही है। ट्रंप ने भारत के उच्च टैरिफ को भी आलोचना का आधार बनाया, यह कहते हुए कि भारत अमेरिकी सामानों पर दुनिया में सबसे अधिक शुल्क लगाता है, जबकि अमेरिका भारत के साथ कम व्यापार करता है।
इससे पहले, ट्रंप ने 31 जुलाई को भारतीय निर्यात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो 7 अगस्त से लागू होने वाला है। अब उनकी नई चेतावनी से भारतीय निर्यातकों, खासकर स्मार्टफोन, कपड़ा, गहने और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
भारत ने तेल खरीद को जायज ठहराया
भारत ने ट्रंप की धमकी का कड़ा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे “अनुचित और अविवेकपूर्ण” करार दिया हैं। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए रूस से तेल खरीद को जायज ठहराया।
“हमारी अर्थव्यवस्था व्हाइट हाउस से नहीं चलेगी… रूसी तेल भारत में आता रहेगा।” – एस जयशंकर, केंद्रीय विदेश मंत्री

पड़ेगा आर्थिक प्रभाव
ट्रंप की इस घोषणा से भारत के निर्यात क्षेत्र, विशेष रूप से स्मार्टफोन (जैसे iPhone, जो अमेरिका में भारत से 44% आयात होते हैं), कपड़ा और ऑटो पार्ट्स पर दबाव बढ़ सकता है। उद्योगपति हर्ष गोयनका ने सुझाव दिया कि भारत को यूरोप और आसियान देशों के साथ व्यापार बढ़ाकर इस संकट को अवसर में बदलना चाहिए।
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा, इसे “झप्पी कूटनीति” की विफलता बताया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
ट्रंप भारत से क्यों खफा हैं?
वजह : रूस से तेल खरीद: ट्रंप का आरोप है कि भारत रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है (जनवरी-जून 2025 में प्रतिदिन 17.5 लाख बैरल), जिसे वैश्विक बाजार में बेचकर मुनाफा कमाया जा रहा है। वे इसे रूस-यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देने वाला मानते हैं।
उच्च टैरिफ: ट्रंप का दावा है कि भारत अमेरिकी सामानों पर दुनिया में सबसे अधिक टैरिफ लगाता है, जिससे अमेरिका के साथ व्यापार असंतुलित है।
व्यापारिक असंतुलन: ट्रंप के अनुसार, भारत अमेरिका के साथ अधिक व्यापार करता है, लेकिन अमेरिका को भारत से कम व्यापारिक लाभ मिलता है।
रणनीतिक दबाव: कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप भारत को रूस से दूरी बनाने और अमेरिका के साथ व्यापारिक नीतियों में बदलाव के लिए दबाव बना रहे हैं।
अब क्या हो सकता आगे ?
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार टैरिफ के प्रभावों का आकलन कर रही है और भारतीय उद्योगों की रक्षा के लिए सभी कदम उठाएगी। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को वैकल्पिक बाजारों, जैसे यूरोप और मध्य पूर्व, पर ध्यान देना होगा। ट्रंप की इस धमकी से भारत-अमेरिका संबंधों में नया तनाव पैदा हो सकता है, लेकिन यह भारत के लिए वैश्विक व्यापार में विविधीकरण का अवसर भी हो सकता है।







