बात- बे-बात बात मत बढाया करो।
हर किसी को यूं न सर चढ़ाया करो।।
खुद ब-खुद एक मुकम्मल जहां आप हैं।
किसने क्या कहा गौर न फरमाया करो।।
वह नुक्ताचीनी करते हैं उनको करने दो।
आप हरगिज न वक्त अपना जाया करो।।
फलख तक है आपकी शोहरत का शोर।
नाचीजों की रायशुमारी पे न जाया करो।।
हर जगह बुराई ढूंढ लेती है इनकी नजर।
फितरत है इनकी इनको न समझाया करो।।
- मनोज शर्मा
सुनो..
तुमने मुझे हमेशा देखना चाहा साड़ी में ,
लाल, पीली, नीली, हरी, काली या फिर
सतरंगी इंद्रधनुष साड़ी में…
तुम बाँधकर नहीं रखना चाहते थे मुझे
कभी किसी भी रूढ़ी परंपराओं में,
बल्कि तुम चाहते थे तुम्हारी प्रियतमा
इस संसार की सबसे सुंदर उर्वसी, मेनका
या रंभा लगे…
– राध्या







