Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Wednesday, August 5
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»विज्ञान

    सीड द्वारा ‘ई-रिक्शा को मुख्य परिवहन साधन बनाना’ शीर्षक रिपोर्ट का विमोचन

    By December 4, 2017 विज्ञान No Comments3 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 597

    रिपोर्ट में स्वच्छ ऊर्जा चार्जिंग से सम्बंधित आधारभूत संरचना की कमी पर प्रकाश डाला गया

    लखनऊ, 4 दिसंबर: सेंटर फॉर एन्वॉयरोंमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) ने आज ‘जीवाश्म ईंधन-मुक्त शहरी सार्वजनिक यातायात: परिवहन की मुख्यधारा में ई-रिक्शा’ (1) नामक रिपोर्ट जारी किया। यह रिपोर्ट मुख्यतः ई-रिक्शा को बड़े पैमाने पर अपना कर मुख्यधारा में लाने और शहरी आवागमन में वायु प्रदूषण को कम कर इसके सामाजिक व पर्यावरणीय फायदों की पड़ताल करती है। इन फायदों को बताने के अलावा यह रिपोर्ट ई-रिक्शा क्षेत्र द्वारा तकनीक, सुरक्षा और बैटरी चार्जिंग के लिए जरूरी आधारभूत संरचनाओं से जुड़ी चिंताओं और चुनौतियों को भी चिन्हित कर उनका समाधान पेश करती है।

    सीड ने ई-रिक्शा पर एक व्यापक मार्केट रिसर्च इस दृष्टिकोण के साथ किया है कि इससे देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यानी बिजली चालित वाहनों के जरिये आवागमन से भविष्य की नयी राहें खुलेंगी, खास तौर पर वर्ष 2030 तक सभी इलेक्ट्रिक वाहनों को सड़कों पर चलाने के केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को ध्यान में रखा जाये तो यह रिपोर्ट बेहद प्रासंगिक हो जाती है। रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि एक सततशील पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के तहत ई-रिक्शा अंतिम पड़ाव तक कनेक्ट करने के विचार को भविष्य में पूरा करने के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है। ई-रिक्शा को पारंपरिक ऑटो रिक्शा के एक स्वच्छ विकल्प के रूप में अपनाने को प्रोत्साहित किया जा सकता है, जो न केवल वायु प्रदूषण के अप्रत्याशित विस्तार को रोकने में मददगार साबित होगा, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए एक किफायती और सस्ता परिवहन समाधान प्रस्तुत करेगा।

    भारत में ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी’ की ओर बदलाव की राह पर चलने का समर्थन करते हुए सीड के मैनेजर-क्लीन एनर्जी, आनंद प्रभु पतंजलि ने कहा कि “ई-रिक्शा न केवल एक वैकल्पिक आवागमन समाधान मुहैया कराते हैं, जो स्वच्छ और किफायती है, बल्कि यह नये रोजगार सृजन करने, आयातित तेल पर निर्भरता कम करने, शहर में कम जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने और वायु प्रदूषण के स्तर को कम करके जन स्वास्थ्य में सुधार आदि का माध्यम बनता है।” उन्होंने इस क्षेत्र के समक्ष आ रही चुनौतियों पर चर्चा करते हुए बताया कि “केवल लखनऊ में करीब 40 हजार ई-रिक्शा हैं और किसी औपचारिक रेगुलेशन के नहीं होने के कारण इनमें से केवल 20 प्रतिशत ही रजिस्टर्ड हैं। इसके परिणामस्वरूप ई-रिक्शा मार्केट में कोई महत्वपूर्ण तकनीकी विकास नहीं देखा गया है। यह वाकई चिंताजनक है कि ये गाड़ियां अब भी अदक्ष ‘‘लेड एसिड बैटरी’’ पर चलती हैं और इनमें कई सेफ्टी स्टैंडर्ड का अभाव है।”

    ई-रिक्शा क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित किसी रेगुलेशन का नहीं होना है। इसके अलावा यह रिपोर्ट अन्य कई चुनौतियों पर प्रकाश डालता है, जैसे कि ई-रिक्शा से जुडी तकनीक, सुरक्षा और इसकी बनावट। बढ़ते उपयोग के साथ आगे कम चार्ज होते जाने से इसका असर ड्राइवर की आमदनी पर भी पड़ता है।

    इस मौके पर सीड के प्रोग्राम डायरेक्टर अभिषेक प्रताप ने विस्तार से बताया कि “ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रदूषणकारी जीवाश्म ईंधनों पर आधारित पारंपरिक वाहनों का एक बेहतर विकल्प बनाने के लिए शहर के प्रमुख व चिन्हित स्थानों पर सोलर चार्जिंग जैसे स्वच्छ व सततशील ऊर्जा स्रोतों पर आधारित ‘विकेंद्रीकृत चार्जिंग स्टेशन’ को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।”

    इन सबके अलावा रिपोर्ट में दो प्रकार की बैटरी चार्जिंग संरचनाओं की बात कही गई है- बैटरी स्वैप प्रणाली और विकेंद्रीकृत चार्जिंग स्टेशन।

    भारत के गंगा मैदानी क्षेत्रों में प्रदूषण के खतरनाक स्तर के कारण, इंटरनल कम्बशन इंजन (आईसीई) के आधार पर, परिवहन के पारंपरिक साधनों से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलाव एक विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि एक आवश्यकता के रूप में देखा जाना चाहिए।

    Keep Reading

    India’s Space Power Soars, Skyroot Stuns the World

    अंतरिक्ष में भारत की धमाकेदार छलांग: स्काईरूट बना 1.1 बिलियन डॉलर का यूनिकॉर्न

    भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ भविष्य की ओर एक ठोस कदम

    Early Detection of Oral Cancer via AI: Recognized by the Government of India!

    एआई से ओरल कैंसर की शुरुआती पहचान, भारत सरकार ने दी मान्यता!

    Stepping into the Next Level of AI! DCESIS Students from Lucknow Triumph at IBM Hackathon

    एआई के अगले स्तर पर कदम! लखनऊ के डीसीएसआईएस छात्रों ने IBM हैकथॉन में मारी बाजी

    India’s Space Race Enters New Era: Vikram-1 Set for Launch

    भारत के निजी स्पेस मिशन में ऐतिहासिक उड़ान! ‘विक्रम-1’ रॉकेट श्रीहरिकोटा के लिए रवाना

    Kansai Nerolac has put its paint to the toughest test by sending it into space! It remains vibrant even at -64°C temperatures at 86,000 feet.

    कंसाई नेरोलैक ने पेंट को अंतरिक्ष में भेजकर किया सबसे कठिन टेस्ट! 86,000 फीट ऊपर -64°C तापमान में भी चमक बरकरार

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Open gym inaugurated at Khun Khun Ji Girls' College; students receive a fitness gift.

    खुन खुन जी गर्ल्स कॉलेज में खुला ओपन जिम, छात्राओं को मिला फिटनेस का तोहफा

    August 5, 2026
    Do you know why the Kanwar Yatra is undertaken and what its history is?

    क्या आप जानते हैं कांवड़ यात्रा क्यों की जाती है और क्या है इसका इतिहास

    August 4, 2026
    Lost a leg, but not the spirit! Undertaking the Kanwar Yatra with a prosthetic leg.

    एक पैर गंवाया, हौसला नहीं! कृत्रिम पैर से कर रहे हैं कांवड़ यात्रा

    August 4, 2026
    Fraud at Kashi Vishwanath in the name of VIP darshan; police facilitate refund.

    काशी विश्वनाथ में VIP दर्शन के नाम पर ठगी, पुलिस ने दिलाए पैसे वापस

    August 3, 2026

    दोस्त : इस ज़माने में दोस्ती ले – दे के बची है थोड़ी-बहुत

    August 2, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading