लखनऊ, 20 जनवरी, 2020: जब मन में जज्बा हो, ध्यान केन्द्रीत तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती। यह बात सिद्ध किया है बाराबंकी के जलालपुर में रहने वाले अरुणेन्द्र वर्मा के पुत्र यस वर्मा ने, जिसने जेईई मेन्स में 99.34 परसेन्टाइल पाकर किर्तीमान हासिल किया है। अरुणेन्द्र खुद भी एक अध्यापक हैं। यस वर्मा का कहना है कि पढ़ाई का माहौल उन्हें अपने घर से ही मिला। यस ने मीडिया से में बातचीत कहा कि हमेशा सीख मिली कि सफलता के लिए ध्यान को एक जगह केन्द्रीत करना और उसके अनुसार अपनी कार्य योजना बनाना सबसे पहले जरूरी है।
यस वर्मा का कहना है कि जब जेईई मेन्स की तैयारी करने की योजना बनाई तो सबसे पहले इसमें सफल अभ्यर्थियों की कार्य योजना के बारे में जाना। उसके बाद उस हिसाब से पढ़ाई की योजना बनाई और तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि इस दौरान एक साल तक वाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया से थोड़ा दूरी बनाए रखा। पढ़ाई से संबंधित यदि आवश्यक होता तो दिन भर में एक बार मोबाइल देख लेता और फिर अपनी पढ़ाई में जुट जाता।
यस वर्मा के अनुसार प्रतिदिन पढ़ाई का औसत नौ से 10 घंटे रहा। उसके अनुसार ही पढ़ाई की। वहीं यस के चाचा कोआपारेटिव बैंक के चेयरमेन धीरेन्द्र वर्मा का कहना है कि यस पहले से ही प्रतिभाशाली, होनहार युवक था। उसे सिर्फ माहौल की जरूरत थी, जो उपलब्ध कराया गया। इसके बाद उसकी प्रतिभा दिख गयी।
यस वर्मा ने आगे की तैयारी के बारे में बताया कि वह आईएएस अधिकारी बनना चाहता है। उन्होंने बताया कि आईआईटी करने के बाद वे आईएएस की तैयारी करना चाहते हैं। आईएएस ही क्यों? के जवाब में उन्होंने कहा कि वह देश की सर्वोच्च परीक्षा और सर्वोच्च पद माना जाता है। उसका सपना तो हर एक को रहता है। उससे देश की सेवा का अच्छा मौका मिलता है। उसमें रहकर हम राष्ट्रभाव को ज्यादा जगा सकते हैं।







