उपभोक्ता परिषद जल्द ही पूरे मामले पर नियामक आयोग में लगाएगा याचिका और करेगा न्याय की गुहार
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि स्मार्ट मीटर को लेकर अनेकों जाँच हुई लेकिन किसी भी जाँच का खुलासा सार्वजानिक नहीं किया गया पिछले लगभग 5 माह से स्मार्ट मीटर लगने पर रोक है सभी को पूरे प्रदेश में पता है कि स्मार्ट मीटर परियोजना संदेह के घेरे में है ? बिना यूजर एक्सेप्टेंस टेस्ट यूएवटी किए, स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओ के परिसर पर लगाए गये पूरी परियोजना ओपेक्स मॉडल पर है और प्रतेक मीटर पर हर माह रुपया 86 विजली विभाग ईईएसएल को देगा।
अब पावर कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक महोदय का कहना है की जिन उपभोक्ताओ को लगता है उनका स्मार्ट मीटर तेज चल रहा उपभोक्ता टैरिफ ऑर्डर के अनुसार रुपया 175 जमा कर चेक मीटर लगवा सकता है जबकि पावर कार्पोरेशन को यह सोचना चाहिए की यह कोई सामान्य परिस्थितः नहीं है जहा टैरिफ आदेश का हवाला दिया जा रहा गारंटी अवधि में स्मार्ट मीटर पर उपभोक्ता को संदेह है वो भी एक दो को नहीं ज्यादातर सभी लगभग 12 लाख उपभोक्ता को ऐसे में पावर कार्पोरेशन को अपना आदेश संसोधित कर यह करना चाहिए की चेक मीटर की फीस ईईएसएल के बिल से काटा जायेगा क्यों की वह फयदा कमा रहा पूरी तकनीकी की जिम्मेदारी उसकी क्योंकि वह हर माह किराया ले रहा है ऐसे में उपभोक्ता को संतुष्ट करना उसकी जिम्मेदारी।
उपभोक्ता परिषद् नियामक आयोग में लगाएगा याचिका और करेगा न्याय की गुहार
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि जरा सोचिए पूरी गलती ईईएसएल व मीटर निर्माता कंपनी की और मीटर तेज चलने की शिकायत के लिए उपभोक्ता की जेब ढीली ! सोचो अगर 12 लाख उपभोक्ता अपनी संतुस्टी के लिए चेक मीटर की फीस देगा तो फिर बिजली विभाग के खजाने में 21 करोड़ रुपये की लूट मचेगी ही।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा बड़े दुर्भाग्य की बात है की अभी कुछ माह पहले जब कुछ स्मार्ट मीटर की रीडिंग पुराने लगे मीटर से जब कम आ गयी तो पावर कार्पोरेशन में हल्ला मच गया कि खपत कम कैसे आयी और एक आदेश प्रदेश में भेज दिया गया कि टीम बनाकर जाँच कराई जाय! अरे भाई! उपभोक्ता की खपत घटना बढ़ना उसके द्वारा किए जा रहे उपभोग पर है। कभी कम कभी ज्यादा लेकिन उस आदेश से ऐसा लगा जैसे पावर कार्पोरेशन को पक्का यकीन है कि स्मार्ट मीटर तेज चलने के लिए ही बना फिर धीरे कैसे चला उपभोक्ता परिषद को स्मार्ट मीटर तकनीकी का विरोधी बिलकुल नहीं ? लेकिन स्मार्ट मीटर रूपी घटिया तकनीकी का विरोध करता है।
उपभोक्ता परिषद ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा आज तक किसी भी दोषी के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गयी उल्टे अभियंताओ की एक लाबी स्मार्ट मीटर को सफल बताकर पुनः उपभोक्ताओ के यहाँ लगवाने की तैयारी में जुटी है सबसे बड़ा सवाल यह है कौन सी ऐसी ताकत है जिसके दबाव में आज तक स्मार्ट मीटर प्रकरण में किसी के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हुई ? प्रदेश का उपभोक्ता प्रदेश सरकार से इस पर स्वेत पत्र चाहता है उपभोक्ताओ के घर में लगने वाला मीटर रूपी तराजू की विस्वसनीयता जानने का हर उपभोक्ता को पूरा अधिकार है उपभोक्ता परिषद् माननीय मुख्यमंत्री जी से मांग करता है वह खुद मामले की गम्भीरता को समझें और निर्णय लें।







