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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    दीदी जाछे आसोल परिवर्तन आछे!

    ShagunBy ShagunMarch 26, 2021 Current Issues No Comments5 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार बनेगी,यह देखने को चुनाव परिणाम मिलने तक प्रतीक्षा करनी होगी। लेकिन यहां की चुनावी तस्वीर अभूतपूर्व है। पहली बार कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियां हाशिये पर है। जबकि मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सिमट गया है। यह भी स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस की राह इस बार आसान नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभाओं का दृश्य भी भाजपा का उत्साह बढ़ाने वाला है। जेपी नड्डा,अमित शाह,योगी आदित्यनाथ भी पार्टी एजेंडे को प्रभावी रूप में आगे बढ़ा जाते है।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन्हें बाहरी बता रही है। यह उनकी निराशा की अभिव्यक्ति है। इसके जबाब में नरेंद्र मोदी ने दो तथ्य उठाये है। उनका कहना है कि पूरा देश एक है। यह राष्ट्रीय चिंतन है। बंगाल में जन्मे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ही जनसंघ की स्थापना की थी। यह आज भाजपा के नाम से देश की सबसे बड़ी पार्टी है। नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि बंगाल का बेटा ही भाजपा की तरफ से यहां का मुख्यमंत्री बनेगा। ममता बनर्जी ने अपने संकुचित विचार को ही उजागर किया है। वह रोहंगिया व अवैध घुसपैठियों के प्रति सहानुभूति रखती है। कांग्रेस व कम्युनिस्ट की तरह यह उनके लिए वोटबैंक सियासत का हिस्सा है। जबकि अपने देश के नेताओं को बाहरी बता रही है। ऐसे में राष्ट्रीय धारा में विश्वास रखने वाले पश्चिम बंगाल के लोग ममता से असहमत है। इसीलिए नरेंद्र मोदी अमित शाह जेपी नड्डा योगी आदित्यनाथ आदि नेताओं की जनसभा में भारी भीड़ उमड़ रही है।

    ममता बनर्जी को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वह केंद्रीय मंत्री थी। तब वह भी राष्ट्र की ही बात करती थी। अब वह अपने स्वार्थ को वरियता दे रही है। इसलिए देश के नेता उनके लिए बाहरी हो गए। अवैध घुसपैठिये यहां के संसाधनों में हिस्सेदारी कर रहे है,वह तृणमूल कॉंग्रेस के लिए अपने हो गए। जबकि अवैध घुसपैठियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक माना जाता है। ममता बनर्जी भले ही देश के प्रधानमंत्री को बाहरी बता हों,लेकिन नरेंद्र मोदी की चुनावी सभा में रिकार्ड भीड़ उमड़ रही है। इसका मतलब है कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने ममता बनर्जी के विचार को नकार दिया है। राष्ट्रीय पार्टी भाजपा के प्रति रुझान बढ़ रहा है।

    पूर्वी मिदनापुर के कांथी में रैली में नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी पर निशाना लगाया उन्होंने कहा कि बंगाल के कोने से कोने से अब एक ही आवाज़ आ रही है, बंगाल के हर घर से एक ही आवाज़ आ रही है, बंगाल के हर मुख से एक ही आवाज़ आ रही है। वह यह कि दो मई दीदी जाछे और आसोल परिवर्तन आछे। उन्होंने कहा कि जब जरूरत होती है तब दीदी दिखती नहीं,जब चुनाव आता है तो कहती हैं- सरकार दुआरे-दुआरे। यही इनका खेला है। पश्चिम बंगाल का बच्चा-बच्चा ये खेला समझ गया है।

    नरेंद्र मोदी के इस कथन पर जन समुदाय ने भारी उत्साह का प्रदर्शन किया। इससे जाहिर है कि नरेंद्र मोदी के प्रति उनका विश्वास है। ममता का बाहरी वाला मुद्दा यहां के लोगों ने खारिज कर दिया है। इसी क्रम में नरेंद्र मोदी यहां हुए घोटालों को उठा रहे है,जिसके चलते जरूरतमन्दों तक राहत नहीं पहुंच चुकी। नरेंद्र मोदी यह बताना चाहते है कि ममता बनर्जी चुनाव के कारण यहां के लोगों को अपना बता रही है। यदि इन्हें अपना माना जाता तो इनको मिलने वाली सहायता का बंदरबांट नहीं होता।

    नरेंद्र मोदी ने खुला आरोप लगाया कि बंगाल में एम्फन की राहत राशि की लूट की गई। गरीब को चावल नहीं मिला। वह भी घोटले की भेंट चढ़ गया। एम्फन प्रभावित लोग आज भ बदहाल है। ये आज भी टूटी हुई छत के नीचे जीने को मजबूर क्यों हैं। मेदिनीपुर के पीड़ित प्रदेश सरकार से गुहार कर रहे है,सवाल उठा थे है,लेकिन ममता बनर्जी के पास इन बातों का कोई जबाब नहीं है। कुछ दिन पहले भी नरेंद्र मोदी ने कहा कि ममता बनर्जी ने बंगाल के सभी युवाओं को अपना भतीजा नही समझा। इनकी उन्हें कोई चिंता नही है। उन्हें केवल अपने भतीजे का ध्यान रहता है। इस बीच किसानों के नाम पर आंदोलन चलाने वाले नेता बंगाल पहुंचे है। यहां वह ममता बनर्जी का प्रचार कर रहे है। भाजपा ने अपरोक्ष रूप से इसको भी मुद्दा बना लिया है। उसके नेता किसान कल्याण संबन्धी अपनी सरकार की उपलब्धियां बता रहे है। इसी के साथ वह ममता बनर्जी पर किसानों का हित करने नाकाम रहने का आरोप लगा रहे है।

    वैसे भी दिल्ली सीमा पर महीनों से चल रहा आंदोलन देश के किसानों को आकर्षित करने में नाकाम रहा है। इसका बड़ा कारण है कि किसानों के बीच नरेंद्र मोदी की नेकनीयत पर विशवास है। किसानों को लगता है कि कृषि कानून भी उनकी भलाई के लिए है। किसानों के नाम पर चल रहे आंदोलन की असलियत अब सामने आ रही है। अपने को चर्चा में बनाये रखने को आंदोलन के नेता पश्चिम बंगाल कूच कर रहे है। इस पैतरे से इस आंदोलन का राजनीतिक एजेंडा सामने आ गया है। आंदोलन के नेता भाजपा के विरुद्ध चुनाव प्रचार के लिए पश्चिम बंगाल गए है। लेकिन बिडंबना देखिए यहां ये नेता किसानों का मुद्दा उठाने की स्थिति में ही नहीं है। क्योंकि जिसके पक्ष में वह प्रचार के लिए आये है,उनका किसान कार्यवृत्त दयनीय है।

    नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसान भूल नहीं सकता कि कैसे दीदी ने निर्ममता दिखाई है। दीदी ने आपको पीएम किसान सम्मान निधि से वंचित रखा। दो मई को बंगाल के विकास के बीच आ रही दीवारें टूट जाएंगी। यहां भाजपा की सरकार बनेगी और किसानों के हक के तीन साल के पैसे भी उनके खातों में मैं जमा करके रहूंगा। पिछले तीन साल के जो पैसे दीदी ने नहीं दिए वह भी किसानों को दिया जाएगा।

    Shagun

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