Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 606 विकास जीतेगा या जाति! राष्ट्रवाद जीतेगा या जाति!! अपराध जीतेगा या जाति! तुम्हारा दल या मेरा दल, कौन जीतेगा देश या जाति! हैं सवाल यहाँ भाँति-भाँति!! चुनाव ही लाता यहाँ क्राँति! क्या क्राँति ला सकती मात्र जाति!! – राहुल कुमार गुप्त
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन