लखनऊ,15 सितम्बर 2019: उपभोक्ता परिषद का कहना है कि प्रदेश की बिजली कम्पनियां जहां एक ओर सुधार के बड़े-बड़े दावे करती हैं वहीं दूसरी तरफ उनका घाटा क्यों बढ़ता जा रहा है। इसको वह समझने को तैयार नहीं हैं, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है, और उसी का खामियाजा है कि प्रदेश के ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 25 प्रतिशत किसानों की दरों में 13 प्रतिशत व घरेलू शहरी विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 12 से 15 प्रतिशत की वृद्धि की गयी।
1959 में गठित राज्य विद्युत परिषद जिसका कुल घाटा वर्ष 2000 में मात्र 10 हजार करोड़ पहुच जाने पर सरकार ने घाटे का वहन करते हुये राज्य विद्युत परिषद को विघटित कर कई कम्पनियों में विभाजित कर दिया गया और बड़े-बड़े दावे किये गये कि अब बिजली कम्पनियों में व्यापक सुधार होगा।
लेकिन सुधार नहीं हुवा उसका मुख्य कारण समझना सरकार के लिय जरूरी है यह सभी को पता है की वर्ष 2000 तक जब तक बिजलीकम्पनियो का विघटन नहीं हुवा था प्रवन्धन अभियंताओ के पास था लेकिन जब से प्रवन्धन आईएएस के पास गया घाटा बढ़ता गया 1959 से 41 साल में कुल घाटा जंहा 10 हजार करोड़ ही पंहुचा वही अब अब घाटा सब्सिडी के बाद हर साल लगभग 10 हजार करोड़ पहुंच गया इसका सीधा मतलब आईएएस प्रवन्धन ऊर्जा के फील्ड में फेल साबित हुवा है आज अभियंता दिवस है ऐसे में सरकार को सही मायने में ऊर्जा के शीर्ष प्रवन्धन पर केवल अभियंताओ को ही पोस्ट करने पर बिचार करना चाहिय।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा 2001 में बिजली कम्पनियो का कुल घाटा जो लगभग केवल 77 करोड़ था आज वह बढ़कर लगभग 80 हजार करोड़ कैसे पंहुचा इसके लिए पूरी तरह आईएएस प्रवन्धन जिम्मेदार है इस लिए आज अभियंता दिवस पर उपभोक्ता परिषद् प्रदेश सरकार से यह पुरजोर मांग करती है की अब ऊर्जा झेत्र को बचाने के लिए सभी आईएएस को विभाग से अविलम्ब हटा कर अभियंता प्रवंधन को पूरी जिम्मेदारी दी जाय और पिछले 5 वर्षो में लिए गये महतवपूर्ण निर्णयों की उच्च अस्तरीय जाँच कराई जाय।







