कैसा वक़्त है यह ?

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वायरल इशू:
दिल्ली में पुलिस धरने पर है, वक़ील हड़ताल पर हैं। देश की राजधानी की क़ानून व्यवस्था की इससे ख़राब तस्वीर की कल्पना नहीं की जा सकती। दिल्ली के पुलिसवालों का धरना अभूतपूर्व है। पुलिसवाले सिर्फ़ वकीलों से नाराज़ हों ऐसा नहीं है। वकीलों से झड़प के बहाने उनकी अपने वरिष्ठों से बरसों से चली आ रही दबी ढंकी नाराज़गी भी सामने आ गई है। है। अमूल्य पटनायक दिल्ली के पुलिस कमिश्नर हैं । धरने पर बैठे पुलिस कर्मियों की ओर से किरन बेदी का पोस्टर लहराते हुए नारे लगाए गए कि हमारा कमिश्नर कैसा हो, किरन बेदी जैसा हो। पुलिस वालों की नाराज़गी अपनी सेवाशर्तों, पुलिस वालों को मिलने वाली सुविधाओं, कमियों वग़ैरह को लेकर भी है।
धरने पर बैठे पुलिस वालों ने सीधे तौर पर पुलिस यूनियन बनाने और पुलिस वेलफ़ेयर एसोसिएशन बनाने की माँग की है। उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों की बार-वार तमाम अपीलों के बावजूद धरना ख़त्म नहीं किया । पुलिस सुधारों का मामला लंबे समय से लटका हुआ है। दिल्ली पुलिस सीधे केंद्र सरकार के अधीन है, सरदार पटेल की विरासत का दावा करने वाले देश के ताक़तवर केंद्रीय गृहमंत्री क्यों सामने नहीं आ रहे? दिल्ली के सातों बीजेपी सांसद कहाँ हैं?
मोदी जी का शासनकाल इस मायने में वाकई अभूतपूर्व रहा है कि असंतोष की अभिव्यक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों से लेकर दिल्ली के पुलिसवाले तक सड़क पर आ गए। संस्थाएँ ध्वस्त हो चुकी हैं, मर्यादा तार-तार हो चुकी है। गृहयुद्ध की आशंकाएँ सच में बदल रही हैं।
. अमिताभ श्रीवास्तव की वॉल से

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