असफलता जीवन का अंत नहीं

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अक्सर देखा जाता हैं कि माता-पिता अपने बच्चों पर जिन-जिन बातों का दबाव बनाते हैं उनमें से एक है लगातार सफल होने का। इस दबाव के मामले में अब तो उम्र भी नहीं देखी जाती। छोटे बच्चों से बड़े लोगों की तरह सफलता की अपेक्षा की जा रही है। इधर से माता-पिता दबाव बनाते हैं और उधर से बच्चे विद्रोह करने लगते हैं। यह सही है कि हमें अपने बच्चों को सफल बनाना चाहिए, लेकिन एक प्रयोग और करते रहिए।

जब हम अपने बच्चों को सफलता के क्षेत्रों से परिचित करवा रहे हों, उसी समय हम उन्हें यह भी जानकारी देते रहें कि जीवन में असफलता के भी कई क्षेत्र होते हैं। एक बार असफल होने पर टूट न जाएं। एक असफलता को जीवन का अंत न मानें। यह सफलता का आरंभ हो सकता है। जब हमारे बच्चे किसी क्षेत्र में असफल हों तो तुरंत हम उनके साथ खड़े हो जाएं। उस समय उनको ज्ञान बांटना, समझाइश देना या क्या गलती तुम कर गए, उसका दोषारोपण न करें। अपने जिस नुकसान को वो बहुत बड़ा मान रहे हैं, आप उनके साथ भावनात्मक रूप से शामिल हों। यहां से एक सहानुभूति, एक विश्वास जागेगा।

अगले चरण में उन्हें समझाएं कि मनुष्य के पास चयन की सुविधा है। कोई बच्चा लगातार प्रयास करे कि उसे डॉक्टर ही बनना है और पूरी ताकत के बाद भी सफल न हो तो उसे बताएं कि नुकसान तो बहुत बड़ा हुआ है लेकिन अब पूरी हिम्मत, उत्साह के साथ क्षेत्र बदल लें। अब डॉक्टर बनने के बजाय इसी योग्यता से कुछ और बना जाए। बच्चों को मेडिटेशन से भी जोड़ें, क्योंकि ध्यान एक विश्राम होगा। जैसे एक अच्छी नींद निकाल लें तो दिनभर की झपकियों से मुक्ति मिल जाती है। ऐसे ही थोड़ी देर का मेडिटेशन फिर कुछ नया करने का उत्साह भर उन्हें सफलता के मार्ग पर बढ़ा देता है।

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