प्रयागराज माघ मेला विवाद में संत समाज की एकजुटता का संदेशमुख्य घटना: माघ मेले में शंकराचार्य के साथ कथित बदसलूकी
प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द जी को संगम स्नान के लिए पालकी (रथ) पर जाने से रोका गया। भीड़ प्रबंधन के नाम पर उनके शिष्यों और बटुकों के साथ धक्का-मुक्की हुई। आरोप लगा कि पुलिस ने कुछ संतों/बटुकों की चोटी (शिखा/बाल) पकड़कर खींचा और अपमानित किया। शंकराचार्य जी ने इसे अपमान बताते हुए धरना दिया और माफी की मांग की। मेला प्रशासन ने उनके ‘शंकराचार्य’ पद पर भी नोटिस जारी किया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
अनिरुद्धाचार्य जी का बेबाक बयान
प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने इस मामले में खुलकर शंकराचार्य जी का साथ दिया। उन्होंने कहा कि “प्रशासन को शंकराचार्य जी से माफी मांग लेनी चाहिए। संत के चरणों पर जाइए, वो संत हैं वह माफ कर देंगे। आपको किसने अधिकार दे दिया कि आप बाल पकड़कर हिलाए? इतनी अकड़ क्यों हैं?” उन्होंने आगे जोड़ा कि जो लोग सच, धर्म और BJP की वास्तविक विचारधारा के साथ हैं, वे ऐसे मुद्दों पर खुलकर बोलेंगे। उन्होंने यह बातें सार्वजानिक रूप से मीडिया के सामने कहीं खास तौर से ABP न्यूज़ के संवाददाता के द्वारा पूंछे गए सवाल पर । सोशल मीडिया पर हलचल और आशंका कई लोग इसे संत समाज की एकता और धर्म की मर्यादा का मजबूत संदेश मान रहे हैं।
कुछ यूजर्स चिंता जता रहे हैं कि अनिरुद्धाचार्य जी के इस बेबाक रुख के कारण उनसे कोई पद या कथावाचक संबंधित भूमिका छीनी न जाए! जैसा पहले कुछ मामलों में देखा गया है।
सवाल अभी बाकी हैं
- माफी मांगना कमजोरी है या संस्कृति की असली ताकत?
- संत तो क्षमा कर देंगे, लेकिन प्रशासन की ‘अकड़’ का क्या?
यह घटना सनातन परंपरा, संतों के सम्मान और प्रशासन की जिम्मेदारी पर बड़ी बहस छेड़ रही है।







