बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक इस खराब एयर क्वालिटी के शिकार बन रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण से बचने के लिए लोग मास्क लगाने से लेकर खान-पान तक का पूरा ध्यान रख रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण की वजह से ऐसे पौधों की मांग बढ़ती रही है जो एअर प्युरिफायर यानी वायु को शुद्ध रखने का काम करते हैं।
कई रिसर्च से यह पता चला है कि आधुनिक बंद इमारते सड़को से 10-15 गुना अधिक प्रदूषित हैं, लिविंग एरिया के आसपास कई रासायनिक एजेंट मौजूद हैं, आधुनिक निर्माण तकनीक, कृत्रिम पदार्थों का उपयोग, खराब वेंटिलेशन का होना, पहले से कई बार उपयोग किये गए इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्श आदि प्रदुषण को बढ़ाने का कार्य करते हैं , जिसे साइंस की भाषा में एसबीएस (सिक बिल्डिंग सिंड्रोम) के नाम से जाना जाता है।
आइए जानतें हैं कौन से हैं वो पौधे है जो जहरीली हवाओं से निपटने में कारगर हैं और इन्हें लगाने से आपके घर का वातावरण साफ और शुद्ध रहेगा।
एलोवेराएलोवेरा प्लांट:
एलोवेराएलोवेरा प्लांट बहुत गुणकारी होता है। एलोवेरा फॉर्मेल्डिहाइड जैसी हानिकारक गैस को दूर करता है। इसे लगाना बहुत आसान है। एलोवेरा सूर्य की किरणों को तेजी से ग्रहण करता है।
ऐरेका पाम:
इस ऐरेका पामइस पौधे को लिविंग रूम प्लांट भी कहा जाता है। ये पौधा हवा से फार्मेल्डिहाइड, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों को दूर कर शुद्ध ऑक्सीजन देता है। घर की हवाओं की शुद्धिकरण के लिए कम से कम इसके 4 पौधे लिविंग रूम में लगाएं।
मनी प्लांट:
मनी प्लांट अधिकतर घरों में पाया जाता है। ये हवा को शुद्ध करने में बहुत मददगार है। ये आसानी से और कहीं भी बढ़ जाते हैं। मनी प्लांट घर में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाते हैं।
गरबेरा डेजी:
चमकीले फूलों वाला ये पौधा हवा को साफ करने का काम करता है। ये कई रासायनिक तत्वों को घर से बाहर निकालता है। इसे आप अपने बेडरूम में भी लगा सकते हैं।
गुलदाउदी का पौधा:
ये पौधा हवा को शुद्ध करने के साथ घर की खूबसूरती को भी बढ़ाता है। ये कई रंगो में और बहुत ही मनमोहक होते हैं। इसे यह जड़ी बूटी का सदाबहार पौधा भी कहा जाता
कमरों में बढ़ रही गैसें बना देंगी मंदबुद्धि:
वायु प्रदूषण और क्लाइमेट चेंज हमारे शरीर को किस तरह प्रभावित करता है, इसके बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका असर मानसिक तौर पर भी पड़ता है। हाल ही में हुई एक स्टडी में इसका खुलासा हुआ है। अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर द्वारा किए एक शोध में इस बात की जानकारी मिलती है।
स्टडी के अनुसार क्लाइमेट में बढ़ता कार्बन डाईऑक्साइड हमारी सोचने-समझने की क्षमता को धीरे-धीरे कम कर रहा है। हमारी कई तरह की गतिविधियों की वजह से इस हानिकारक गैस का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। स्टडी मे कहा गया है कि कार्बन डाईऑक्साइड के असर से व्यक्ति को किसी भी चीज पर फोकस करने में परेशानी होती है। बाहर के मुकाबले घर के अंदर ये हानिकारक गैस ज्यादा पाई जाती है। जिस जगह जितने ज्यादा लोग होते हैं, वहां उतनी ही ज्यादा कार्बन डाईऑक्साइड पाई जाती है।
स्टडी में कहा गया है कि हम खुद कार्बन डाईऑक्साइड पैदा करने वाली मशीन हैं। वैज्ञानिकों ने ये भी दावा किया है कि खतरनाक गैसें इसी तरह बढ़ती रहीं तो इस सदी के आखिर तक सही फैसले लेने की हमारी क्षमता लगभग आधी हो जाएगी।







