होली आते ही चारो तरफ का मौसम बदलने लगता हैं। विशेषकर होली से सम्बंधित अनेको गाने की धुनों में से इस गाने की धुन ” रंग बरसे भीगे चुनर वाली रंग बरसे” वाली धुन चारो ओर सुनाई देने लगती है। लोगों पर होली का खुमार पहले से चने लगता है और एक दूसरे मित्र से पूंछने लगते हैं भाई आज क्या प्रोग्राम है अगर नहीं है तो बना लेते हैं होली है।
लेकिन आज के इस मँहगाई के दौर में होली का त्यौहार मात्र औपचारिकता बनकर रह गई है। जाने कहाँ गये वह दिन जब हमारे समाज में होली का महीना आते ही प्रत्येक घरों के विशेष कर बच्चों मे मिठाइयां, पापड़ की खाने की की होड़ सी लग जाया करती थी।

घरों में विशेष कर गुजिया बनाने की तैयारी के बीच बच्चों के नये कपड़े पहनने और बनवाने के लिये उनका उत्साह देखते ही बनता था, लेकिन जब से डिजिटल युग की शुरुआत हुई है उस समय से पुराने सभी तरह के रीति रिवाजों से ही रंग उड़ गया है, लोगों ने घर जाकर गले मिलकर होली की शुभकामनाएं देने के बजाये अब सोशल मीडिया पर उतर आएं है और होली के शुभकामना सन्देश अब मोबाइल और कंप्यूटर से देने लग गए हैं, ऐसा नहीं है कि यह दौर ख़राब है बल्कि इसे आधुनिकता की दौड़ कहेंगें कि अब किसी के पास समय नहीं है। बस यूं कहें कि धीरे-धीरे रंगों के इस त्यौहार को मनाने का चलन व तौर तरीके ही धीरे धीरे समाप्त होने लगा है या कहे बदल गया है। आज सब कुछ डिजिटल केंद्रित है जिसने आपके घर से लेकर बाज़ारवाद को भी अपनी गिरफ्त में खेंच रखा है। ऐसा प्रतीत होने लग गया है कि कही न कहीं आने वाले दिनों में लेटर बम की तरह लेटर रंग बाजार में बिकने लगे इसे जिसे भेजा जाय उसके द्वारा इस लेटर को खोलते ही उसके पूरा का पूरा मुहँ ही रंगों से भर कर पुतजाये।
लेकिन कई जगह ऐसी भी हैं जहां आज भी होली मनाने की परम्परा जारी है
जहां तक इस देश में खेली जाने वाली रंगों से भरी होली का त्यौहार 29 मार्च सोमवार के दिन राधा-कृष्ण की भूमि मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, गोकुल यानी पूरे ब्रज भूमि में एक सप्ताह पहले से रंग, गुलाल उड़ने शुरू हो गए हैं तो दूसरी तरफ 22 मार्च से बरसाना के राधा रानी मंदिर में लड्डूओं की होली खेले जाने के साथ होली के त्यौहार मनाने की शुरुआत हो चुकी है मथुरा के बरसाना में लट्ठमार होली के त्यौहार को मनाने की परम्परा की शुरुआत बड़े ही धूमधाम से प्रति वर्ष की तरह शुरू हुई। मालूम हो कि मथुरा के बरसाना की लट्ठमार होली सम्पूर्ण दुनिया मे प्रसिद्ध है।
कोरोना काल और मँहगाई ने लोगों कि कमर जरूर तोड़ दी है लेकिन लोगों ने आज भी मुस्कुराना नहीं भी छोड़ा है वह आज भी खुश है और रंगों से भरी पिचकारी लेकर आपके साथ होली खेलने के लिए बाहर परिवार के साथ खड़ा है बस जरूरत है आपके पहुंचने की जहाँ आज नई नवेली दुल्हन के भेष में खड़ी होली आपका इन्तजार कर रही है जोगी जी धीरे धीरे जोगी वाह, जोगी जी। हैप्पी होली! – प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती







