होली का मस्त धमाल: ढोलक, मजीरों और झींको की धुन पर फागुनी बयार में होती है होली की मस्ती
होली के आठ दिन बाद तक चलेगा गांवों में फागों का सिलसिला अब युवाओ की टोली बढ़चढ़कर ले रही हिस्सा। ढोलक, मजीरों और झींको की धुन पर फागुनी बयार गांव-गांव इन दिनों चल रही है।
बता दें कि बंसत पंचमी के दिन से शुरू होकर पूरे फागुन माह तक इनकी आवाज सुनाई देगी। बसंत पंचमी से इसकी शुरुआत होती है और फिर शाम से गांवों की फागों की चैपालों में फागुनी बयार का रंग देखते ही बनता है। गांवों में इन चैपालों को रोज शाम देखा जा सकता है। वही, फागों के गाने के शौकीन लोगो को क इस महीने का इंजतार रहता है। इसके बाद लोग लगभग रोजाना एक निश्चित स्थान पर जमा होते है और फागुनी बयार में फागों की धुन पर समां बांधते है। ये सिलसिला होली तक चलता है। होली के दिन फाग गानें वालों की टोली पूरे गांव में प्रत्येक घर में फाग के रंगो के साथ पहुचती है। इस फाग की बयार में उम्र दराज ही नही बल्कि अब युवा वर्ग भी काफी रूचि लेते है।
जबावी फाग भी होते है
जबावी कीर्तन और भजन की ही तरह से अलग-अलग गांवो की जबावी फाग की बराबरी भी होती है। जिसमें इलाके के कई चर्चित लखनऊ के गांव जैसे निगोहां, लवल, सिसेंडी, मदापुर, बिरसिंहपुर, नंदौली, हरिहरपुर पटसा, बघौना, उदयपुर, अगईया सहित कई गांव है। इन फागुनी गीत से होती है।
शुरूआत, सुमरिन करो आदि भवनिन काराजन मनो बचन हमारौ और अबै रंग डारौ न श्याम बिहारी, वीर अभिमन्यु सभा मे आयो औरज्ज्ज ब रथ हरि अर्जुन का हाकेव सहित कई अन्य तरह के फागों के साथ इनकी शुरूआत होती है।
फाग की इस चैपाल में गावों के बुजुर्गों के अलावा नवयुवक तथा बच्चे भी हिस्सा लेते हैं। एक निश्चित स्थान पर ये चौपाल शाम को शुरू होती है जो देर रात तक चलती है। कुछ गांव में तो रोजाना घर बदल कर गीत देर रात तक गाये जाते हैं।







