नाग पंचमी: सांपों की पूजा करने से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव

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हमारे देश मे लगभग सभी हिन्दू धर्मालंबियों के मध्य आज के दिन श्रावण महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्यौहार प्रतिवर्ष मनाये जाने का विधान है। इस बार यह त्यौहार की मुहूर्त 15 अगस्त यानी की स्वत्रंतता दिवस के दिन ही पड़ने से यह त्यौहार आज मनाया जा रहा है। इस दिन देश के कई हिस्सों में सांपों की पूजा किये जाने की प्रथा प्रचलित है। हिन्दू धर्मालबियों में सांप को भगवान शंकर के श्रंगार के रूप में गले मे धारण करने वाले गहने की तरह माना जाता है जिसके कारण ऐसी मान्यता है कि सांपों की पूजा करने से स्वमं भगवान शंकर प्रसन्न हो कर लोगों को मनवांछित फल देते हैं।

इस दफे आज 15 अगस्त के दिन नागपंचमी पर स्वार्थ सिद्धि योग बनने के कारण भारतीय ज्योतिष शाश्त्र के अनुसार इस योग को बहुत ही शुभ योग माना जा रहा है। ऐसा मत है कि नागपंचमी के दिन नाग देवता की विधि विधान पूर्वक पूजन करने से आर्थिक दृष्टि से बहुत लाभ मिलता है और जीवन में कभी भी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। दरअसल नाग-पंचमी का पर्व धार्मिक आस्था व विश्वास के सहारे हमारी बेहतरी की कामना का प्रतीक है। यह जीव-जंतुओं के प्रति समभाव, हिंसक प्राणियों के प्रति भी हमे दयाभाव व अहिंसा के अभयदान की प्रेरणा देता है।

सांप खेतों में रहकर कृषि-संपदा (अनाज) को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों को खा जाते हैं, इसलिए उन्हें किसानों का मित्र या क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। अनेक जीवन-रक्षक औषधियों के निर्माण के लिए नागों से प्राप्त जहर की जरूरत होती है। अत: नाग हमारा जीवन-रक्षक भी है। इसी कारण आधुनिकता वाले वर्तमान युग में भी नाग-पंचमी का त्योहार प्रासंगिक है। नाग-पंचमी पर नाग की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है। नाग-पंचमी का पर्व धार्मिक आस्था व विश्वास के सहारे हमारी बेहतरी की कामना की उद्देश्य का प्रतीक है। यह जीव-जंतुओं के प्रति समभाव, हिंसक प्राणियों के प्रति भी दयाभाव व अहिंसा के अभयदान की प्रेरणा देता है।

यह पर्व पर्यावरण से भी जोड़ा जाता है। सांप खेतों में रहकर कृषि-संपदा (अनाज) को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों को खा जाते हैं, इसलिए उन्हें किसानों का मित्र या क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। अनेक जीवन-रक्षक औषधियों के निर्माण के लिए नागों से प्राप्त जहर की आवश्यकता होती है। अत: नाग हमारे लिए जीवन-रक्षक का काम करती है। इसी कारण आज आधुनिक वर्तमान युग में भी नाग-पंचमी का त्योहार प्रासंगिक है।
जी क़े चक्रवर्ती
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