Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Tuesday, October 13
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»इंडिया»Gandhi Jayanti

    बापू के नाम एक और ख़त…….

    ShagunBy ShagunOctober 2, 2020 Gandhi Jayanti No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 631
    व्यंग्य: के के अस्थाना 
    अच्छा हुआ बापू कि तुम्हारा पाला अंग्रेजों की पुलिस से पडा. कहीं आज़ाद भारत की पुलिस के हत्थे चढ़ गए होते, तो सविनय अवज्ञा आन्दोलन धरा रह जाता. ऐसी ऐसी धाराओं में बुक करते कि साल दो साल जमानत तक न हो पाती. कुछ नहीं तो तुम्हारी धोती की अंटी से  स्मैक की एक पुड़िया की बरामदगी ही दिखा देते. दो साल तक पहली पेशी भी नहीं होती. मन मसोस कर जेल की किचेन में काम करते रहते.  पिछले सत्तर सालों में विरोधियों और बागियों से निपटना इस देश की सरकारों ने ठीक से सीख लिया है.
    तुम्हे शायद लग रहा होगा कि मै मजाक कर रहा हूँ. या फिर बढ़ा चढ़ा कर बता रहा हूँ. अरे बापू, हमारी जेलों में ज्यादातर ऐसे ही कैदी हैं जो विचाराधीन यानी अंडर ट्रायल हैं.  जितनी उनके जुर्म की सज़ा होती उससे ज्यादा टाइम तो वह वैसे ही जेल में बिता चुके होते हैं. और उनका मुकदमा शुरू नहीं होता है. आप सोच रहे होंगे कि आज़ाद भारत में ऐसा कैसे हो सकता है ! इसीलिये कहता हूँ कि आप बहुत सही समय से प्रस्थान कर गए. अब वो समय नहीं रहा कि जज कहे आप घर जाइये और आप कहें कि नहीं मुझे जेल ही जाना है. छूट जाए तो सीधे घर भाग आना चाहिए. ज्यादा गांधीगिरी का जमाना नहीं रहा.
    वह ज़माना और था. और तुम्हारा अवज्ञा का हथियार भी नया था. वह अचानक समझ ही नहीं पाए कि कोई कानून मानने से इनकार भी कर सकता है, वह भी हाथ जोड़ कर. वह उनकी कल्पना से भी बाहर था. वह चकित के साथ साथ भ्रमित भी हो गए. इसलिए अचकचा गए. समझ नहीं पाए कि क्या करें. अब तुम्हारा यह हथियार चकित नहीं करता. हमारे आजादी के बाद के अंग्रेज इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं. वह, उनका प्रशासन, उनकी पुलिस, सब इस हथियार की काट जान गए हैं. अब तुम आओ और किसी मुद्दे पर एक बार फिर सविनय अवज्ञा आन्दोलन करके अपनी बात मनवा कर दिखा दो, तो मान जाए.
    तुम सरे आम प्रार्थना सभाएं करके भी धर्मनिरपेक्ष थे, यह बात आज कोई मान भी नहीं सकता है. आज तुम होते तो बात बात पर राम राम न कर पाते. रामराज्य का सपना देखने पर तुम्हे साम्प्रदायिक घोषित कर दिया जाता. तुम्हारी नियमित प्रार्थना सभाओं को एक धर्म विशेष को बढ़ावा देने वाला काम माना जाता. इस पर कार्यस्थगन भी हो सकता था और कई कई दिन सदन भी बाधित रह सकता था. तुम्हे सर्वधर्म समभाव की अपनी भावना का प्रमाण देना पड़ता. प्रार्थना सभा में दूसरे धर्मों की पूजाएँ भी शामिल करनी पड़तीं. हो सकता है कि इस बात पर तुम्हे सोशल मीडिया में ट्रोल भी किया जाता.
    वैसे तुम्हारे बाद धर्मनिरपेक्षता को लेकर बड़ा कंफ्यूजन शुरू हो गया. ‘धर्म निरपेक्ष’ को यहाँ आम बोलचाल की भाषा में ‘सेकुलर’ कहा जाता है. इस सेकुलर नाम के  शब्द का अर्थ जाने बिना उसका सबसे अधिक प्रयोग करने का विश्व रिकॉर्ड यदि कोई है, तो इसी देश के नेताओं के नाम दर्ज है. उन्हें इस शब्द का अर्थ भले ही न पता हो, पर उनकी पार्टियों के नाम तक में इसका खूब उपयोग हुआ है. बताते हैं कि धर्म एक अफीम की तरह है. इस देश में धर्मनिरपेक्षता तो धर्म से भी बड़ी अफीम साबित हुई है.
    सेकुलरवाद ने यहाँ अब खुद एक धर्म का ही नहीं, संकीर्ण सम्प्रदाय का रूप ले लिया है. जो बहुसंख्यक धर्मनिरपेक्ष नहीं है, वह साम्प्रदायिक है, ऐसा मानने का चलन हो गया है. बताते हैं कि कुछ अति उत्साही लोग धर्मनिरपेक्षता के नाम पर बहुसंख्यकों से धर्महीनता की अपेक्षा करने लगे. कुछ लोगों द्वारा भगवा रंग को साम्प्रदायिकता का प्रतीक करार दिया जाने लगा.  बहुसंख्यक साम्प्रदायिक दिखने के डर से खुद को हिन्दू कहने में संकोच करने लगे. बहुसंख्यक नेताओं द्वारा रोजा इफ्तार देना और उसमे गोल टोपी लगाना धर्मनिरपेक्षता का मापदंड बन गया.
    तुमने भी तो कभी इफ्तार पार्टी नहीं दी. कभी गोल टोपी भी नहीं लगाईं. इसका मतलब तुम धर्मनिरपेक्ष नहीं थे. बापू, मै बता रहा हूँ, तुम बहुत सही टाइम पर चले गए, वरना खुद को धर्म निरपेक्ष सिद्ध करते करते जिंदगी बीत जाती. भारतीय  बहुसंख्यकों में से यदि कोई  इस बारे में कुछ भी बोल दे, तो उसको दक्षिणपंथी या संकीर्ण विचारधारा वाला कहे जाने का फैशन सा हो गया. तुम देखना मेरी इतनी विवेचना को भी बहुत लोग संकीर्ण मानसिकता मान लेंगे.
    तुमने हमें आदमी बनने की सलाह दी. उन्होंने तुम्हे देवता बना दिया. तुम्हारी आलोचना को ईशनिंदा के समकक्ष कर दिया. उधर कुछ लोग तुम्हे मनुष्य समझ कर, तुम्हारे कामों में मानवीय भूलें देखने लगे. तुम्हारे काम  की समीक्षा करने लगे. तुम्हारे कुछ कामों पर उँगलियाँ भी उठाने लगे. ऊँगली तो तुम्हारे राम पर भी उठी थीं. इसका मतलब यह तो नहीं कि तुम्हारे राम भगवान् नहीं रहे. वह समीक्षा कर रहे हैं इसका मतलब तुम्हे समझने की कोशिश तो कर रहे है. इसका मतलब यह तो नहीं कि तुम अप्रासंगिक हो गए. तुम्हारा महत्व घट गया. तुम होते तो इस बात पर खुश होते, क्योंकि तुम सच के साथ थे.
    बापू, तुम निश्चिन्त रहो. तुम्हारी हर निशानी को हमने ठीक से संजो कर रखा है. आश्रम के तुम्हारे कमरे में सब सामान ऐसे रखा है कि जैसे तुम बस अभी वापस आने वाले हो. तुम्हारी घडी, चप्पलें, चरखा सब अपनी जगह पर है. हो सकता है कि थोडा बहुत इधर उधर हो गए हों. तुम्हारे विचार भी उसी तरह आश्रम के पुस्तकालय में सुरक्षित हैं. हो सकता है कि थोडा बहुत  इधर उधर हो गए हों. पर अभी तक हैं. वैसे तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूँ कि हमने अब तुम्हे  इस देश में ‘विचारधारा’ की जगह ‘प्रथा’ बना दिया है. – के के अस्थाना की वॉल से से साभार

    Shagun

    Keep Reading

    Minister Mr. A.K. Sharma takes a tough stance against mafia activities and illegal extortion in Mau; issues strict directives to the DM and SP.

    वाराणसी में जलभराव पर गिरी गाज, अधिशासी अभियंता निलंबित

    Eight BJP Rajya Sabha candidates filed their nominations.

    भाजपा के आठ राज्यसभा प्रत्याशियों ने दाखिल किया नामांकन

    ‘नये औजार से कबीर की खुदाई’ ने छेड़ा नया विमर्श, पुस्तकों के बीच गूंजीं कविताएं

    ‘नये औजार से कबीर की खुदाई’ ने छेड़ा नया विमर्श, पुस्तकों के बीच गूंजीं कविताएं

    "Books focus the mind and connect it with traditions" - Brajesh Pathak; Isha-Misha Ratan's Kathak performance captivated the audience

    ‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन

    A Grand Gathering of Books: 23rd 'National Book Fair' to be Held in Lucknow Starting October 1st

    किताबों का महाकुंभ: लखनऊ में 1 अक्टूबर से सजेगा 23वां ‘राष्ट्रीय पुस्तक मेला’

    Victory in the Banda seat will now become a reality for the SP!

    सपा के लिए बांदा सीट की विजय अब बनेगी हकीकत!

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Nyrraa M. Banerjee gets emotional recalling memories of her first film with Nana Patekar.

    नाना पाटेकर के साथ पहली फिल्म की यादें, नायर्रा एम. बनर्जी हुईं भावुक

    October 11, 2026
    Civil Defence stands with flood victims in Faizullaganj; distributes relief supplies.

    फैजुल्लागंज में बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ा सिविल डिफेंस, बांटी राहत सामग्री

    October 11, 2026
    Residents of the dilapidated Badalikheda took to the streets.

    बदहाल बदालीखेड़ा के नागरिक सड़कों पर उतरे

    October 11, 2026
    Don't just educate your daughters—let their dreams take flight.

    बेटियों की पढ़ाई नहीं, उनके सपनों को दें उड़ान

    October 11, 2026
    ‘Dream big, work hard to make them come true’: Dr. Ankita Raj

    ‘सपने बड़े देखें, मेहनत से पूरा करें’ : डॉ. अंकिता राज

    October 11, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading