मुंबई, 17 अक्टूबर 2025: इस ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे पर, डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया ने एक अनूठी पहल, ‘हाइजीन बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड (H-BALA)’ लॉन्च कर स्वच्छता शिक्षा में एक नया अध्याय शुरू किया है। यह भारत का पहला ऐसा मॉडल है, जो स्कूल की इमारतों को “हाइजीन लर्निंग हब्स” में बदलकर बच्चों को स्वच्छता की आदतें सिखाने का एक रचनात्मक और मजेदार तरीका पेश करता है। इसकी शुरुआत मुंबई के वर्ली स्थित प्रभादेवी प्राइमरी मराठी स्कूल में हुई, जहां दीवारों, फर्श और गलियारों को स्वच्छता संदेशों और इंटरैक्टिव शिक्षण उपकरणों से सजाया गया है।
कब मनाया जाता है ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे : – ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे हर साल 15 अक्टूबर को मनाया जाता है।
H-BALA: स्वच्छता का 6C मंत्र
H-BALA का 6C दृष्टिकोण – करिकुलम, कम्युनिटीज़, कोलैबोरेशन, कैंपस, कनेक्ट और चिल्ड्रन – स्वच्छता को शिक्षा का हिस्सा बनाकर बच्चों को प्रेरित करता है। यह मॉडल न केवल किताबी ज्ञान देता है, बल्कि स्कूल के माहौल को एक जीवंत शिक्षण प्रयोगशाला में बदल देता है। उदाहरण के लिए:करिकुलम: स्वच्छता को विज्ञान, कला और खेलों के साथ जोड़ा गया है, जैसे हैंडवॉशिंग गीत और इंटरैक्टिव क्विज़।
कैंपस: स्कूल की दीवारों पर रंग-बिरंगे स्वच्छता संदेश और गेम-आधारित शिक्षण उपकरण।
कम्युनिटीज़: अभिभावकों और स्थानीय समुदायों को शामिल कर स्वच्छता जागरूकता को बढ़ावा।
चिल्ड्रन: बच्चों को ‘हाइजीन चैम्पियंस’ बनने के लिए प्रोत्साहित करना।
क्यों है H-BALA खास?
H-BALA सिर्फ एक शिक्षण मॉडल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक बदलाव है। यह बच्चों को स्वच्छता की आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करता है, जैसे कि सही तरीके से हाथ धोना, पानी की शुद्धता और व्यक्तिगत स्वच्छता। स्कूल की दीवारों पर चित्रित सुपरहीरो-थीम वाले संदेश और इंटरैक्टिव गेम बच्चों को खेल-खेल में सीखने का मौका देते हैं। उदाहरण के लिए, एक गलियारे में “हाथ धोने के 6 स्टेप्स” वाला गेम-ज़ोन बनाया गया है, जहां बच्चे कदम-दर-कदम सीखते हैं।
20 शहरों तक विस्तार की योजना
रेकिट की योजना H-BALA को अगले तीन वर्षों में भारत के 20 शहरों के स्कूलों तक ले जाने की है। यह पहल ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता शिक्षा को सुलभ और रोचक बनाएगी। रवि भटनागर, रेकिट के कम्युनिकेशंस और कॉर्पोरेट अफेयर्स डायरेक्टर, कहते हैं, “H-BALA बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने का एक अनोखा तरीका है। यह भारत को स्वस्थ और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”12 साल का स्वच्छता सफरडेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया ने पिछले 12 वर्षों में 28 राज्यों के 8.4 लाख स्कूलों में 2.6 करोड़ बच्चों तक पहुंच बनाई है। यह कार्यक्रम न केवल स्वच्छता जागरूकता फैलाता है, बल्कि व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देकर भारत के जनस्वास्थ्य परिदृश्य को बदल रहा है। H-BALA इस सफर का नवीनतम और सबसे अभिनव कदम है।
क्या बनाता है इसे और रोचक?
इंटरैक्टिव लर्निंग: बच्चे स्वच्छता को गीत, नाटक और गेम के ज़रिए सीखते हैं, जो उन्हें लंबे समय तक याद रहता है।
सुपरहीरो थीम: बच्चे खुद को ‘हाइजीन हीरो’ के रूप में देखते हैं, जो उन्हें स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
टेक्नोलॉजी का उपयोग: कुछ स्कूलों में डिजिटल क्विज़ और AR-आधारित स्वच्छता गेम्स को शामिल करने की योजना।
समुदाय की भागीदारी: स्थानीय नेताओं और अभिभावकों को शामिल कर एक समग्र स्वच्छता संस्कृति का निर्माण।
H-BALA मॉडल न केवल बच्चों, बल्कि पूरे समुदाय को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की क्षमता रखता है। यह पहल भारत को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे 2025 पर शुरू हुआ यह अभियान बच्चों को स्वच्छता का ऐसा पाठ पढ़ाएगा, जो न केवल उनकी जिंदगी बदलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगा।
आप भी बनें हिस्सा! – अपने नज़दीकी स्कूल में H-BALA के बारे में जानें और बच्चों को स्वच्छता का चैम्पियन बनने में मदद करें।







