किसानों की बिजली दरों में सरकार कराए 25 प्रतिशत की कमी: उपभोक्ता परिषद

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दावा: पहले ग्रामीण फीडर पर किसानों को 16 से 18 घंटे मिलती थी बिजली अब केवल 10 घंटे वो भी आफ पीक आवर्स में, फिर दरों में क्यों नहीं की जा रही कमी?

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि प्रदेश की सभी बिजली कम्पनियो में पावर कार्पोरेशन द्वारा किसानों के ट्वेबल यानि निजी नलकूप को कृषि फीडर पर आफ पीक आवर्स में 10 घंटे बिजली दिए जाने का आदेश काफी लम्बे समय से चल रहा है जबकि अभी 2 दिन पूर्व पावर कार्पोरेशन ने यह आदेश फिर जारी किया है कि प्रदेश के चारो वितरण निगमों के ग्रामीण क्षेत्रों में मध्यांचल में 184 कृषि फीडर पूर्वांचल में 198 कृषि फीडर पक्षिमांचल में 1154 कृषि फीडर और दक्षिणांचल में 691 कृषि फीडर बन गये हैं यानि चारो बिजली कम्पनियो में कुल 2227 कृषि फीडर बने हैं।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब पावर कार्पोरेशन 75 प्रतिशत किसानो को कृषि फीडर पर टैग करके उनके बिजली घंटो में कमी कर दी है तो फिर बिजली दरों में कमी क्यों नहीं जबकि अनेकों बार इस पर चर्चा हुई है और सभी का मानना है किसानों के साथ सहानुभूति रखी जाएगी फिर भी किसी को चिंता न होना बहुत दुखद है अब जब कृषि फीडर तैयार हो गये है तो अबिलम्ब सरकार को बिजली दरों में कमी करने पर विचार करना चाहिए।

उपभोक्ता परिषद् पहले ही नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर चुका है की बिजली दरों में कमी की जाय ऐसे अब पावर कार्पोरेशन की बारी है की वह अपना निर्णय किसानों के हित में लेकर एक सन्देश दे, वैसे भी उपभोक्ता परिषद् बिजली दर की सुनवाई के दौरान किसानो के कृषि फीडर पर विस्तार से अपनी विधिक आपतिया आयोग को दी थी और पुनः पुनर्विचार याचिका के माध्यम से भी पूरी बात आयोग में रखी गयी है सही मायने में राज्य सरकार साथ दे देगी तो किसानो की बिजली दरे अबिलम्ब 25 प्रतिशत कम हो जाएगी।

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