तीसरे संस्करण में भारत सहित शामिल हुए 16 देशों के 550 से अधिक प्रतिभागी, 90 सत्रों में 100 से ज्यादा भाषाओं का प्रतिनिधित्व
पटना, 28 सितंबर: एशिया के सबसे बड़े साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ का समापन समारोह सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र, ज्ञान भवन, पटना में उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन की उपस्थिति में हुआ। समारोह में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक, और संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल भी शामिल थे।

उपराष्ट्रपति का वक्तव्य: उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्मेष ने भाषायी बंधनों को तोड़कर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार किया। उन्होंने बिहार की सांस्कृतिक विरासत, माँ सीता, भगवान बुद्ध, महावीर, और नालंदा-विक्रमशिला विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए भारत के विश्व गुरु बनने की भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्मेष की उपलब्धियाँ:16 देशों के 550+ प्रतिभागी शामिल।
90 सत्रों में 100+ भाषाओं का प्रतिनिधित्व।
19 सत्रों में 112 साहित्यकारों ने हिस्सा लिया।
प्रमुख सत्र: लोकसाहित्य, व्यंग्य, पर्यावरणशास्त्र, और बाल साहित्य।
विशेष आकर्षण: अमोल पालेकर और संध्या गोखले से बातचीत, रिकी केज की संगीत प्रस्तुति।
संस्कृति मंत्रालय के सचिव: विवेक अग्रवाल ने उन्मेष को प्रतिवर्ष आयोजित करने की योजना और ‘ज्ञानभारतम्’ परियोजना के माध्यम से पांडुलिपि संरक्षण पर जोर दिया।साहित्य अकादमी अध्यक्ष: माधव कौशिक ने इसे ‘साहित्य का महाकुंभ’ बताते हुए संस्कृति मंत्रालय को धन्यवाद दिया।
उन्मेष का यह तीसरा संस्करण इससे पहले शिमला और भोपाल में आयोजित हो चुका है।







