लगातार बढ़ रहा है महिलाओं के खिलाफ अपराधों का आंकड़ा

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निर्भयाकांड के बाद भी नहीं सुधरा देश

नई दिल्ली 17 दिसम्बर। दिल्ली 16 दिसंबर-2012 की रात ठंड से जूझ रही थी। ज्यादातर दिल्लीवासी दफ्तरों से निकलकर घरों में पहुंच चुके थे। इसी दौरान पांच दरिंदों ने निर्भया के साथ चलती बस में दरिंदगी की। इस घटना ने देशभर के लोगों के खून को गर्म कर दिया। लोग सड़कों पर उतर आए और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की। संसद भी सक्रिय हुई और दुष्कर्म के खिलाफ कानून में संशोधन किया। आज निर्भया कांड को पांच साल हो गए हैं। लेकिन दिल्ली सुरक्षित नहीं हुई है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2016 के आंकड़ों के मुताबिक देश में औसत तौर पर हर घंटे महिलाओं के खिलाफ 39 अपराध दर्ज किये जाते हैं। इसी वर्ष प्रति एक हजार महिलाओं पर अपराध का आंकड़ा 55.2 रहा, जो वर्ष 2012 में 41.7 था। पति और रिश्तेदारों की ओर से महिलाओं के खिलाफ अपराध का दायरा वर्ष-2016 में 33 फीसदी था। इसमें महिलाओं के खिलाफ दुष्कर्म के 11 फीसदी मामले दर्ज किए गए, जिसका मतलब था कि उस वक्त प्रत्येक घंटे महिलाओं के खिलाफ चार अपराध होते थे। वर्ष 2016 में महिलाओं की ओर से दर्ज केस में 11 फीसदी आपराधियों को ही सजा मिली।

महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में वर्ष 2007 से वर्ष 2016 तक 83 फीसदी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। वर्ष 2007 में 1,85,312 मामले दर्ज किए गए, जो वर्ष 2016 में 3,89,954 हो गए। महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर के मामले में दिल्ली सबसे आगे रहा है, जहां अपराध का औसत दायरा 160 रहा, जो कि बाकी देश में अपराध के रिकार्ड 55.2 से काफी ज्यादा है। दिल्ली के बाद असम, ओडिशा, तेलंगाना और राजस्थान का नाम आता है। सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ 15 फीसदी अपराध दर्ज किये गए। महिलाओं के खिलाफ अपराध में सजा मिलने के मामले में वर्ष 2007 से 2012 के दौरान सबसे खराब वर्ष 2016 रहा है।

इस वर्ष मात्र 18.9 फीसदी अपराधियों को ही सजा मिली है। पश्चिम बंगाल में वर्ष 2016 में महिलाओं के खिलाफ दर्ज मामलों में देश में दूसरे स्थान पर रहा। लेकिन सजा देने में सबसे नीचे रहा। यहां मात्र 3.3 फीसदी लोगों को सजा दी गई। जबकि मिजोरम में महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को सबसे ज्यादा सजा हुई। यहां दर्ज मामलों में 88.8 फीसदी लोगों को सजा दी गई। उसके बाद पांडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का स्थान आता है। देश में वर्ष 2007 में महिलाओं के खिलाफ औसतन हर एक घंटे में दो केस दर्ज होते थे, जो वर्ष 2016 में बढ़कर चार केस प्रति घंटा हो गया है। इन वर्षों के दौरान मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 4882 केस दर्ज किए गए हैं, जबकि सिक्किम में दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, जहां क्राइम रेट 30.3 रहा, जबकि देश में औसत क्राइम रेट 6.3 था।

दुष्कर्म के मामलों में पिछले दस वर्षों में 88 फीसदी इजाफा हुआ है। दुष्कर्म की शिकार पीड़ित महिलाओं में 43 फीसदी नाबालिग हैं। दुष्कर्म के 95 फीसद मामलों में आरोपी पीड़ित का जानने वाला होता है। इसमें से 29 फीसदी मामलों में दोषी पड़ोसी होता है, जबकि 27 फीसदी मालमों में पति और 30 फीसदी मामलों अन्य होते हैं। देश के 19 बड़े शहर, जहां दो मिलियन से ज्यादा लोग रहते हैं, उनमें पिछले दस वर्षों में सबसे ज्यादा दुष्कर्म के मामले दिल्ली में दर्ज किए गए हैं। दिल्ली में औसतन रोजाना पांच दुष्कर्म के मामले दर्ज होते हैं। दिल्ली में यौन उत्पीड़न की औसत दर 26.3 फीसदी है, जबकि बाकी देश में यह 9.1 फीसदी है।

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