भारत की शान हैं यह धरोहर

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लाल किला: लाल किला दिल्ली में स्थित है, इसकी नींव शाहजहां के शासन काल में पड़ी थी। इसे पूरा होने में 9 साल का समय लगा। लाल किले के प्रमुख आकर्षण हैं मुमताज महल, रंग महल, खास महल, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, हमाम और शाह बुर्ज। यह किला भारत की शान है। इसी किले पर स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और भाषण देते हैं।

हवा महल: गुलाबी नगरी जयपुर की आलीशान इमारत ‘हवामहल’ राजस्थान के प्रतीक के रूप में दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इस इमारत में 365 खिड़कियां और झरोखे बने हैं। इसका निर्माण 1799 में जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था। राजस्थानी और फारसी स्थापत्य शैलियों के मिले-जुले रूप में बनी इस इमारत को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं।

जैसलमेर का किला: राजस्थान में थार की मरूभूमि के हृदय स्थल पर जैसलमेर स्थित है। जैसलमेर के दर्शनीय स्थलों में यहां का प्राचीनतम किला सबसे खास है। यह किला नगर के सामान्य भू-स्तर से लगभग 100 मीटर ऊपर स्थित है। यहां स्थापित समाधियों की छतों में बारीक नक्काशी देखने लायक है। यही नहीं, यहां पूर्व सम्राटों की नक्काशीदार घुड़सवार मूर्तियों का जादू भी सिर चढ़कर बोलता है।

मैसूर पैलेस: महाराजा पैलेस, राजमहल मैसूर के कृष्णराजा वाडियार चतुर्थ का है। इससे पहले का राजमहल चन्दन की लकड़ियों से बना था। एक दुर्घटना में इस राजमहल की बहुत क्षति हुई जिसके बाद यह दूसरा महल बनवाया गया। मैसूर पैलेस द्रविड़, पूर्वी और रोमन स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है।

सांची स्तूप: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और विदिशा के बीच बसा सांची स्तूप दुनियाभर के सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र है। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने यह सांची स्तूप बनवाया था। यह स्तूप शांति, आस्था, साहस और प्रेम का प्रतीक है। सम्राट अशोक ने इस स्तूप का निर्माण बौद्ध धर्म की शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए करवाया था। यह दुनियाभर में मशहूर हो चुका है और अपने ऐतिहासिक महत्व के कारण यूनेस्को के विश्व धरोहर की सूची में भी शामिल है।

चारमीनार: हैदराबाद शहर की पहचान बन चुका चारमीनार इस्लामिक वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। चारमीनार 1591 में शहर के अंदर प्लेग की समाप्ति की खुशी में मुहम्मद कुली कुतुबशाह द्वारा बनवाया गया वास्तुकला का एक नमूना है।

फतेहपुर सीकरी: आगरा जिले का छोटा सा शहर फतेहपुर सीकरी आज भी अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजे हुए है। मुगल बादशाह अकबर ने इस शहर को बसाया था। इस शहर में मुगल सभ्यता, कला और संस्कृति की झलक मिलती है। एक दशक से भी ज्यादा समय तक फतेहपुर सीकरी मुगलों की राजधानी था। यहां की सबसे ऊंची इमारत बुलंद दरवाजा है और इसकी ऊंचाई 280 फुट है। इसे अकबर ने 1602 ई. में गुजरात विजय के स्मारक के रूप में बनवाया था।