नई दिल्ली, 22 अप्रैल : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार दोपहर एक बड़े आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित पहलगाम के बैसरण घाटी में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 27 लोगों की मौत हो गई और 12 अन्य घायल हो गए। यह हमला हाल के वर्षों में कश्मीर में नागरिकों पर सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे, सैन्य वर्दी में दो से तीन बंदूकधारियों ने बैसरण घाटी में पर्यटकों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। यह क्षेत्र अपनी हरी-भरी वादियों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से मशहूर है, जहां उस समय सैकड़ों पर्यटक घुड़सवारी और पिकनिक का आनंद ले रहे थे। हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

खबरों के मुताबिक, आतंकियों ने चुन-चुनकर हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया। कर्नाटक के शिवमोग्गा के 47 वर्षीय व्यवसायी मंजुनाथ राव भी इस हमले में मारे गए, जो अपनी पत्नी पल्लवी और बेटे अभिजय के साथ छुट्टियां मनाने आए थे।
आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा : प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो वर्तमान में सऊदी अरब के दौरे पर हैं, ने हमले की कड़ी निंदा की और ट्वीट किया, “पहलगाम में आतंकी हमले की मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। इस जघन्य कृत्य के पीछे शामिल लोग बख्शे नहीं जाएंगे।” पीएम ने गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात की और स्थिति का जायजा लेने के साथ-साथ सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
कायरतापूर्ण हमला, हम दोषियों पर सबसे सख्त कार्रवाई करेंगे: गृहमंत्री
गृह मंत्री अमित शाह ने हमले को “कायरतापूर्ण” करार देते हुए कहा, “पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकी हमला बेहद निंदनीय है। मृतकों के परिवारों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं। इस कायराना हरकत में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा, और हम दोषियों पर सबसे सख्त कार्रवाई करेंगे।” शाह मंगलवार शाम 7 बजे श्रीनगर के लिए रवाना हो गए हैं, जहां वे एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक करेंगे। उनके साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, गृह सचिव गोविंद मोहन और खुफिया ब्यूरो के निदेशक तपन डेका भी हैं।
इलाके को सुरक्षा बलों ने घेरा, कड़ी कार्रवाई की तैयारी :
हमले के बाद भारतीय सेना की विक्टर फोर्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इलाके को घेर लिया और आतंकियों की तलाश में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सुरक्षा बलों ने सभी निकास मार्गों पर नाकाबंदी कर दी है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे प्रतिबंधित संगठनों का हाथ हो सकता है। सूत्रों ने बताया कि बैसरण घाटी में लश्कर के आतंकियों की मौजूदगी की पहले से खुफिया जानकारी थी।

हाल के वर्षों में नागरिकों पर सबसे बड़ा हमला: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले को “हाल के वर्षों में नागरिकों पर सबसे बड़ा हमला” करार दिया। उन्होंने कहा, “मरने वालों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह हमला बेहद गंभीर है।” कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हमले को “बेहद निंदनीय और हृदयविदारक” बताया और सरकार से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी हमले की निंदा की और पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
हेल्पलाइन नंबर जारी :
जम्मू-कश्मीर सरकार ने पीड़ितों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:
आपातकालीन नियंत्रण कक्ष, श्रीनगर: 0194-2457543, 0194-2483651
खुफिया एजेंसियों ने थी पहले जानकारी :
पहलगाम, कश्मीर घाटी का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो हर साल हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस हमले ने क्षेत्र के पर्यटन उद्योग पर गहरा आघात पहुंचाया है। बता दें कि खुफिया एजेंसियों ने पहले ही गर्मियों में कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में वृद्धि की चेतावनी दी थी। यह हमला फरवरी 2019 के पुलवामा हमले के बाद कश्मीर में सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक माना जा रहा है, जिसमें 47 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।
जानकारी के अनुसार सुरक्षा बल आतंकियों को पकड़ने के लिए व्यापक तलाशी अभियान चला रहे हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस हमले के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। दिल्ली पुलिस को भी पर्यटक स्थलों और महत्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।







