चांद को रोटी समझने वाले बच्चे बहुत मजबूर थे

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भूख बहुत नज़दीक थी लेकिन चंदा मामा दूर थे,
चांद को रोटी समझने वाले बच्चे बहुत मजबूर थे।
अफसर हलवा खाते थे और बच्चे नमक से रोटी,
देखकर ये गुस्से मे चंदा, चंद्रयान से दूर थे।
– नवेद शिकोह

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