“हुंकारी” के 75वें जन्मदिन पर सजी काव्य संध्या में जिले के प्रसिद्ध कवियों ने समां बांधा
बाराबंकी। साहित्य साधना संस्थान से लंबे समय तक जुड़कर बाराबंकी की साहित्यिक भूमि को उर्वरा बनाने वाले वरिष्ठ साहित्यकार कवि जय प्रकाश “हुंकारी” के 75वें जन्मदिन पर सजी काव्य संध्या में जिले के प्रसिद्ध कवियों ने अपनी रचनाओं के द्वारा हुंकारी जी को बधाई दी और उन्हें स्वस्थ्य रहने की शुभकामनाएं अर्पित की। श्री हुंकारी जी काफी समय से अस्वस्थ्य चल रहे हैं, उनकी खुशी के लिए यह काव्य संध्या महत्वपूर्ण रही है। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता 81 वर्षीय कवि सनत कुमार “अनाड़ी” ने की तो संचालन युवा ओज के गीतकार दीपक दिवाकर ने किया। सभी कवि व साहित्यकारों ने हुंकारी जी को माल्यार्पण, शॉल एवं उपहारों से सम्मानित कर उनके दीर्घायु होने की शुभकामनाएं दी।
गुरु के चरणों हूँ मैं अभागा नहीं। प्रस्तुत कर आर्शीवाद लिया। वहीं राष्ट्रीय कविताओं के प्रस्तोता ओज कवि डॉ ओपी वर्मा ओम द्वारा राष्ट्र प्रेम के दीप जलाने का आहवान करते हुए पंक्तियां प्रस्तुत की गई -हम कविता नहीं सुनाने केवल तुम्हें जगाने आये हैं, बस राष्ट्र प्रेम के दीप यहां पर पुनः जलाने आए हैं।
हास्य व्यंग्य के रचनाकार अनिल कुमार श्रीवास्तव “लल्लु जी” ने अपनी रचना-
हवा चलय सनासन तौ समझौ बसन्त है,
मित्र मिलय भनाभन तौ समझौ बसन्त है,
मित्रन कै हुवै टोली् जम के लगय ठहाके,
गूरूदेव जौ टनाटन तौ समझौ बसन्त है…के द्वारा हुंकारी जी के स्वस्थ्य रहने की कामना की। जहां ज्ञान विज्ञान सीखने आते देश तमाम, दिल कहता है बार-बार बस करता रहूं प्रणाम… रचना द्वारा ओज कवि डॉ अमरीश “अंबर” ने बधाई दी। संचालक दीपक दिवाकर ने ओज की रचना पढ़ी- “उन वीरों के लिए ये
शब्द सुमनो का हार,
देश भक्ति को जो माना ग्रंथ और माला है।
देश रूपी मंदिर के तम हरने के लिए,
प्राण रूपी वर्तिका जला के की उजाला है।”
पंडित राम किशोर तिवारी किशोर ने बधाई देते हुए कहा-“सबय सुनाइन कविता आपन मिलकय बारी बारी, चाय समोसा कै संग मा रसगुल्ला भारी-भारी, जन्मदिवस पर यहय प्रार्थना ईश्वर से हम चाही, पूरा शतक लगावें भईया जय प्रकाश हुंकारी। वरिष्ठ समाजसेवी एवं पत्रकार रत्नेश कुमार ने हुंकारी जी को माला-शाल से सम्मानित कर उन्हें स्वस्थ्य, दीर्घायु होने की कामना की और अपनी रचना “जिंदगी में सदा मुस्कुराते रहो,
गीत खुशियों के सबको सुनाते रहो, आपका आशीष हम-सब को मिले, शतायु हों सबको हंसाते रहो…।







