61.65 लाख स्मार्ट मीटर लगे, 47.43 लाख बिना सहमति प्रीपेड में बदले, विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का खुला उल्लंघन
परिषद ने केंद्र सरकार से मांग की तत्काल हस्तक्षेप, राज्य सरकार पर कानून की रक्षा का दबाव
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों को बिना उपभोक्ता सहमति के प्रीपेड मोड में बदलने का मामला गरमा गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) और नई कॉस्ट डाटा बुक के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है।
16 जनवरी तक प्रदेश में 61,64,908 स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 47,43,499 मीटरों को बिना सहमति प्रीपेड में परिवर्तित कर दिया गया। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों से भी उपभोक्ताओं के इस अधिकार की पुष्टि होती है कि वे पोस्टपेड या प्रीपेड मोड खुद चुन सकें।
वर्तमान में 31,79,011 उपभोक्ता नेगेटिव बैलेंस में हैं, जहां कुल बकाया राशि करीब 1,097 करोड़ रुपये पहुंच गई है। बता दें कि उपभोक्ता अचानक मोड बदलाव से भ्रमित हैं, न सही भुगतान कर पा रहे हैं और न स्थिति समझ पा रहे हैं।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह राष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है, जिससे राज्य सरकार की छवि धूमिल हो रही है। परिषद ने केंद्रीय ऊर्जा सचिव को अवगत कराया है और जल्द उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) में जाकर उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त आदेश की मांग करेगी।
परिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि कानून के अनुसार उपभोक्ताओं को मोड चुनने की स्वतंत्रता तुरंत बहाल की जाए और पावर कॉर्पोरेशन अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करे।







