आयेाग के फैसले के बाद बिजली दर बढोत्तरी अब संभव नही?

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आयोग ने अपने फैसले में बिना टैरिफ बढोत्तरी प्रपोजल के बिजली दर सुनवाई के लिये दी हरी झंडी, 10 व 13 अगस्त को होगी सुनवाई

लखनऊ, 28 जुलाई, 2020: अन्ततः बिजली कम्पनियों की तरफ से दाखिल वर्ष 2020-21 की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) ट्रूअप वर्ष 2018-19 व वार्षिक परफारमेन्स रिव्यू वर्ष 2019-20 को विद्युत नियामक आयोग की पूर्ण पीठ ने आज स्वीकार करते हुये बिजली दर प्रस्ताव पर सुनवाई की हरी झंडी दे दी। अब बिजली कम्पनियाॅं चोर दरवाजे से उपभोक्ताओं की बिजली दर बढोत्तरी नही करा पायेंगी, क्योंकि आयोग ने अपने आदेश में बिजली कम्पनियों को चारों तरफ से कस दिया और बढोत्तरी का रास्ता ही कर दिया बन्द।

बता दें कि नियामक आयोग चेयरमैन श्री आरपी सिंह व सदस्यगण श्री कौशल किशोर शर्मा एवं श्री विनोद कुमार श्रीवास्तव द्वारा वर्ष 2020-21 के लिये लगभग 70792 करोड का एआरआर स्वीकार करते हुये बिजली कम्पनियों को बडा झटका देते हुये अपने आदेश में यह बडा फैसला सुना दिया कि एआरआर स्वीकार करने तक प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा अपने गैप लगभग 4500 करोड की भरपायी के लिये कोई भी टैरिफ बढोत्तरी का प्रस्ताव दाखिल नही किया गया। ऐसे में बिजली कम्पनियाॅं अब एआरआर के जो आंकड़े हैं उसे ही 3 दिन में समाचार पत्रों में प्रकाशित करायें जिससे विद्युत उपभोक्ता अपनी आपत्ति व सुझाव दाखिल कर सकें और उस पर सुनवाई की तिथि भी आयेाग द्वारा 10 अगस्त व 13 अगस्त तय की दी गयी है जो वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जायेगी।

उपभोक्ता परिषद की लामबंदी काम आयी अब बिजली कम्पनियाॅं उपभोक्ताओं की बिजली दरों में बढोत्तरी नही करा पायेंगी क्योंकि आयोग ने अपने आदेश में गैप के एवज में कोई भी बिजली प्रस्ताव न दाखिल करने का अपने आदेश में इंगित कर दिया है। ऐसे में नियमानुसार अब बिजली कम्पनियाॅं कोई भी प्रस्ताव दाखिल नही कर पायेंगी और अन्ततः अब बिजली दर में कोई भी बढोत्तरी कराना संभव नही है।

आज सुबह से ही उ0प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेष कुमार वर्मा नेे बिजली दर में बढोत्तरी रोकने के लिये अपनी लामबंदी शुरू कर दी थी और सुबह 10 बजे ही विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन को एक लोक महत्व प्रस्ताव भेजकर यह माॅंग उठायी थी और अध्यक्ष नियामक आयेाग श्री आर0 पी0 सिंह से बात भी की थी और कहा था कि चूॅंकि बिजली कम्पनियों ने चोर दरवाजे से बिजली दर बढाने का खेल खेला है और गैप की भरपायी के लिये कोई भी बिजली दर का प्रस्ताव नही दाखिल किया है। ऐसे में एआरआर स्वीकार आर्डर में यह लिखा जाये कि बिजली कम्पनियों ने टैरिफ बढोत्तरी का कोई भी प्रपोजल नही दाखिल किया। इसलिये अब एआरआर के आकडो पर ही सुनवाई होगी। और अन्ततः आयेाग ने अपने आर्डर में यह स्पष्ट कर दिया कि बिजली कम्पनियों द्वारा टैरिफ बढोत्तरी का कोई भी प्रस्ताव नही दिया गया।

उपभोक्ता परिषद ने आगे फिर अपनी मांग दोहराते हुये आयोग के सामने यह प्रस्ताव लिखित में दाखिल किया कि विद्युत नियामक आयोग को बिजली उपभोक्ताओं का उदय व ट्रूअप में वर्ष 2017-18 तक कुल लगभग रुपया 13337 करोड़ बिजली कम्पनियो पर निकल रहा है। जिसे आगे उपभोक्तओ को पाश किया जायेगा आयोग ने कहा था । जो अब कैरिंग कॉस्ट 13 प्रतिशत जोड़ कर लगभग रुपया 14782 करोड़ हो गया है जिसको पूरा उपभोक्तओ को यदि आयोग पास आन करे तो लगभग 25 प्रतिशत बिजली दरों में कमी होगी वही बिजली कम्पनियो के 4500 करोड़ के गैप को घटा दिया जाय फिर भी बिजली दरों में 16 प्रतिशत की कमी होनी चाहिए।

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