इस बार भी बैंक कर्मियों की मिलीभगत
मुंबई 15 मार्च-2018। नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के घोटाले की आंच से तप रही पंजाब नेशनल बैंक में एक और घोटाले का पता चला रहा है। हालांकि इस बार जिस घोटाले का खुलासा हुआ है, उसकी रकम पिछली बार के मुकाबले कम है। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, यह घोटाला भी मुंबई की पीएनबी ब्रांच में हुआ है। एफआईआर के मुताबिक नया घोटाला 9.09 करोड़ रुपए का है। बताया जा रहा है कि इस नए घोटाले की एफआईआर नौ मार्च को दर्ज की गई है। इसके अनुसार, इस घोटाले को चंदेरी पेपर एंड एलाइड प्रोडक्ट्स नाम की कंपनी द्वारा अंजाम दिया गया।
आरोप है कि संबंधित कंपनी को भी कर्ज देते वक्त नियमों का पालन नहीं किया गया, जैसा कि नीरव मोदी के केस में भी हुआ था। पीएनबी घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, घोटाले से जुड़ी परतें खुलती जा रही हैं। घोटाले के उजागर होते वक्त कहा जा रहा था कि यह घोटाला 11700 करोड़ का है। इसके बाद यह बढ़कर 12700 करोड़ तक पहुंच गया। दो दिन पहले ही घोटाले की राशि में और 900 करोड़ रुपए का इजाफा हो गया है और अब यह करीब 13600 करोड़ का हो गया है। सीबीआई ने इससे पहले दावा किया था कि जनवरी में पीएनबी की ओर से मिली शिकायत के बाद शुरू की गई जांच में पाया गया था कि बैंक अधिकारियों की ओर से नीरव मोदी की कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी एलओयू जारी किए गए थे।
एलओयू किसी अंतरराष्ट्रीय बैंक या किसी भारतीय बैंक की अंतरराष्ट्रीय शाखा की ओर से जारी किया जाता है। इस लेटर के आधार पर बैंक कंपनियों को 90 से 180 दिनों तक के शॉर्ट टर्म लोन मुहैया कराते हैं। इस लेटर के आधार पर कोई भी कंपनी दुनिया के किसी भी हिस्से में राशि को निकाल सकती है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर आयात करने वाली कंपनियां विदेशों में भुगतान के लिए करती हैं। लेटर ऑफ अंडरटेकिंग किसी भी कंपनी को लेटर ऑफ कम्फर्ट के आधार पर दिया जाता है। लेटर ऑफ कम्फर्ट कंपनी के स्थानीय बैंक की ओर से जारी किया जाता है। पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में इस लेटर का ही इस्तेमाल किया गया है।
ज्वैलरी डिजायनर नीरव मोदी ने अपनी फर्म के आधार पर पंजाब नेशनल बैंक से यह फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग हासिल किए। इनको नीरव मोदी ने विदेशों में अलग अलग सरकारी और निजी बैंक की शाखाओं से भुना लिया। भुनाई हुई राशि करीब 11000 करोड़ की थी।







