भाजपा को दोहरा आघात

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राष्ट्रवाद के प्रति समर्पित थे अरुण जी
भाजपा को कुछ ही दिन के अंतराल पर दोहरा आघात लगा। करीब एक जैसे तेवर वाले दो सुयोग्य नेताओं को पार्टी ने खो दिया। इनकी समानता यहीं तक सीमित नहीं थी। दोनों की उम्र लगभग बराबर थी। पार्टी को उम्मीद थी कि अभी लंबे समय तक इन दोनों का सहयोग मिलता रहेगा।
दोनों प्रभावशाली वक्ता थे, दोनों कुशल रणनीतिकार थे, दोनों बेहतरीन तर्कशास्त्री थे, दोनों पार्टी के कठिन समय में पार्टी को बल प्रदान करने वाले थे, दोनों अच्छे प्रशासक थे, दोनों ने अंतिम ट्वीट कश्मीर पर हुए निर्णय को लेकर किये थे, दोनों ने इस पर राहत की सांस ली थी, दोनों ने सदैव राजनीतिक शिष्टाचार का पालन किया। पहले सुषमा स्वराज नहीं रहीं, अब अरुण जेटली का निधन हो गया।
बीमारी की अवस्था में उन्होंने समाज के हित का ध्यान रखा। तीस जुलाई को उन्होंने रायबरेली दो सौ हाईमास्क लाइट के लिए अपनी सांसद निधि से धनराशि दी थी। वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य थे। जीएसटी पर सभी पार्टियों और सभी राज्यों की सहमति हासिल करना उनकी राजनीतिक कुशलता का परिणाम था। वित्तमंत्री के रूप में वह अनेक आर्थिक योजनाएं बनाने व लागू करने में नरेंद्र मोदी के सबसे विश्वासपात्र सहयोगी थे।
दिलीप अग्निहोत्री

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