लापरवाही से बढ़ते हादसे, बिलखते परिजन

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अपनों को खोने का गम क्या होता है यह बात लापरवाही से गाड़ी चलाने वाले क्या जाने, यह तो वही जानता है जिस पर मुसीबत का पहाड़ टूटता है। कितने प्रियेजनों को खोने का अहसास और इकलौते कमाने वाले का चले जाने का दुःख हमेशा सालता रहता है।

बता दें कि ‘हाईवे’ यानी यमुना एक्सप्रेस में पलक झपकते ही 29 लोगों की मौत और 23 के बुरी तरह जख्मी होने की घटना वाकई अफसोसनाक है। लखनऊ से दिल्ली आ रही उत्तर प्रदेश सरकार की बस एक्सप्रेस से फिसलकर 20 फुट गहरे नाले में गिर गई। शुरुआत में इसे बस ड्राइवर का बहुत तेज गाड़ी चलाना और नींद आना बताया गया, मगर सिर्फ इसी वजह से देश में हादसे होते हैं, यह कहना या मानना समझदारी नहीं होगी। सड़क हादसों के मामले में देश की स्थिति वाकई बेहद गंभीर है।

आंकड़े भी इसकी तस्दीक करते हैं। देश में हर मिनट में एक सड़क हादसा होता है, हर चार मिनट में एक की मौत होती है। यानी सालाना करीब 1.35 लाख लोग सड़क हादसों के शिकार होते हैं। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में देखें तो 2017 में यहां 1,612 लोग मारे गए। 2018 में यह संख्या 1,684 थी। दरअसल, सड़कों पर वाहन चलाने के मामले में न तो हम अनुशासित हैं और न हमारा सिस्टम चुस्त-दुरुस्त है।

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देश में लापरवाही से गाड़ी चलाना, तेज गति से वाहन भगाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, नियमों की अनदेखी करना आदि कारक हादसों को न्योता देते हैं। रही सही कसर थके-मांदे चालक, सड़कों की खराब गुणवत्ता, कम रख-रखाव वाले वाहन, निम्न दज्रे की सड़क डिजाइन, सड़क किनारे बचाव के उपकरण या उपाय और खराब इंजीनियरिंग क्वालिटी भी हादसों की अहम वजह बनते हैं। इसके उलट हमारे यहां दुर्घटनाओं को भुला दिया जाता है।

तेलंगाना में कुछ माह पहले 61 लोगों की बस पलटने से मौत हो गई थी। उसकी जांच रिपोर्ट में क्या कुछ निकलकर आया, इसे सार्वजनिक करने में सरकार को रुचि दिखानी चाहिए थी। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि हमने विदेशों से भले एक्सप्रेस-वे की संकल्पना को अपने यहां लागू किया, मगर जनता को अनुशासित और समझदार बनाने में काफी वक्त लगेगा।

जब तक नियम लागू कराने वाली संस्था लापरवाही पर सख्ती नहीं करेगी तब तक इस तरह की वारदात को रोकने में हम फिसड्डी ही साबित होते रहेंगे। इस नाते दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेने की जरूरत है। दोषियों पर कार्रवाई समय की मांग है। यह भी तत्काल देखना होगा कि एक्सप्रेस-वे के निर्माण में किन-किन सुझावों की अनदेखी की गई है। यह नहीं भूलना चाहिए कि हादसों में केवल मौत ही नहीं होती, कई परिवार लाचार और अपना बहुत कुछ खो देते हैं।

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