दिलीप अग्निहोत्री
महात्मा बुद्ध ने शांति, सौहार्द का सन्देश देकर मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाया। उन्होंने बताया कि हिंसा से किसी का भला नहीं हो सकता। परस्पर अहिंसा का भाव होगा, तो कोई व्यक्ति किसी अन्य को पीड़ा नहीं पहुँचायेगा। तब सभी में एक दूसरे के प्रति सहयोग व सौहार्द का विचार पल्लवित होगा। जीव जंतुओं के प्रति भी दयाभाव होना चाहिए। आधुनिक युग में खासतौर पर विकसित देशों ने घातक अस्त्र शस्त्र के जखीरे बना लिए है। बुद्ध का देश भारत कभी आक्रमणकारी नहीं रहा। भारत ने सदैव विश्व शांति की कामना की है। इतना ही नहीं इसके लिए सदैव प्रयास भी किये है।महात्मा बुद्ध ने राजपाट एवं घर परिवार त्याग कर कठोर तप से बुद्धत्व प्राप्त करके समाज सुधार का कार्य किया। अन्धविश्वास और कुरीतियों को दूर करते हुए भगवान बुद्ध ने जो व्यवहारिक और सहज शिक्षा एवं दर्शन दिया वह आज भी प्रासंगिक है। महात्मा बुद्ध सामाजिक समानता एवं समरसता के पक्षधर थे, उनके द्वारा बताये गये ‘अष्टांग मार्ग’ में एक वैचारिक दर्शन है। गौतम बुद्ध द्वारा दी गयी शिक्षाएं मनुष्य के जीवन में संजीवनी का संचार कर सकती हैं। मन की शान्ति के लिए भगवान बुद्ध के विचार महत्वपूर्ण हैं।
उक्त विचार उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज बौद्ध बिहार शान्ति उपवन में संयुक्त बुद्ध उपासक संघ द्वारा बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किये। इस अवसर पर आचार्य दया सागर बौद्ध, भिक्खु श्री प्रज्ञासील सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे। राज्यपाल ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करके अपनी आदरांजलि व्यक्त की।
राज्यपाल ने बौद्ध पूर्णिमा की बधाई देते हुए कहा कि भगवान बुद्ध का दर्शन एवं मानव के प्रति उनकी अपार करूणा व गहन संवेदना समाज के लिए अमृत संजीवनी है। भगवान बुद्ध की मन को छू लेने वाली शिक्षाएं व्यक्ति को समाधान की ओर ले जाती है। बौद्ध धर्म मूलतः भारत की श्रवण परम्परा से उत्पन्न धर्म और दर्शन है। बौद्ध धर्म अपनी सहजता और सरलता के कारण देखते-देखते तिब्बत, चीन, मलेशिया, थाइलैण्ड, कोरिया जैसे अनेकों देश में फैला। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी देशों के बीच बौद्ध धर्म भारत के लिए धार्मिक एवं अध्यात्मिक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि पांच वर्षों में यह पहला अवसर है जब उन्हें बुद्ध पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम में आने का सौभाग्य मिला। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि राज्यपाल प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं मंत्रिमण्डल के सदस्यों, उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायधीश एवं न्यायधीशों को शपथ दिलाता है, पर प्रोटोकाल में ऐसा है कि वह स्वयं कहीं नहीं जा सकता, जब तक कि उसे आमंत्रित न किया जाय। उन्होंने आयोजकों द्वारा पहली बार बुलाये जाने के लिये आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर दया सागर बौद्ध ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा एक माँगपत्र भी सौंपा। कार्यक्रम में बौद्ध भिक्षु प्रज्ञासील ने भी अपने विचार रखे।







