विचार प्रवाह: अरविन्द कुमार ‘साहू’
सोशल मीडिया के प्लेटफार्म जिनमें फेसबूक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, ह्वाट्स एप आदि निश्चित रूप से सुख दुख और सभी प्रकार के विचार व सहयोग बाँटने की बड़ी सहूलियत भरी जगहें हैं। लेकिन जब इस सुविधा का दुरुपयोग भी लोग अपने निजी स्वार्थ, चोरी या धोखा देकर लाभ उठाने में प्रयोग किया जाने लगे तो मन खिन्नता से भर जाना स्वाभाविक है।
यूँ तो सोशल मीडिया पर तमामं तरह की धोखाधडियों के किससे आये दिन सुनने को मिलते ही रहते हैं, जिन्हें सुनकर हम दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाते है। लेकिन आज हम एक निजी अनुभव जिक्र करते हुए आपको भी सावधान करने के लिये यह चर्चा करना जरुरी समझते हैं।
पिछले 15 दिन में दो लोगों ने अनायास ही मेरे मैसेंजर में घुसकर बड़ी मासूमियत से नकदी की माँग कर डाली। फेसबुक आईडी प्रोफ़ाईल के हिसाब से ये दोनों मेरे परिचित नाम हैं, मेरे ही छोटे से कस्बे के निवासी हैं, किन्तु उनसे मेरा कभी कोई व्यक्तिगत लेन- देन नहीं रहा । दोनों ही रात आठ बजे के बाद मैसेजबॉक्स में भाईचारा जताने आये।
अपनी जानकारी के मुताबिक एक तो मोबाइल की अच्छी खासी दुकान चलाने वाला खुदा का बन्दा है। उसने हालचाल पूछने के बाद कहा- कुछ पैसे चाहिये। हैं क्या आपके पास?
मैने कहा – कितना चाहिये?
वो बोला – दस हजार रुपये।
मैं चौंका, मुझे पता है कि इतनी रकम नकदी तो क्या, मेरे बैंक खाते में भी नही है इस समय । फिर भी मैने मन रखने के लिये उनको कहा – ठीक है, जितना उपलब्ध है मिल जाएगा। आकर ले जाओ।
वह बोले – मैं आ नही सकता।
मैने जान बूझकर कहा- ओह, कोई बात नही, मैं खुद आपके घर पहुँचा देता हूँ, अपना घर का पता बताईये।
वैसे नाम से मुझे अंदाजा था कि उनका घर कोरोना रेडजोन के सील हुए इलाके में है। किसी पुलिस वाले की मदद से काम हो जाएगा।
लेकिन पता पूछते ही वो हड़बड़ा कर बोले – नही घर मत भेजना, मैं यहाँ नही जयपुर में हूँ ।
मैने कहा- तो बैंक खाता का विवरण दे दो, सुबह ट्रांसफर कर दूँगा।
कहने लगे- अभी तुरन्त चाहिये, पेटीएम से ट्रांसफर कर के तुरन्त भेज दो।
मैने जानबूझकर कहा- मैं पेटीएम नहीं चला पाता । तुम्हें ऐसी भी क्या इमर्जेंसी है?
कहने लगे- यार, मेरे दोस्त की बेटी की तबियत खराब है।
मैने पूछा- लॉकडाऊन में किस दोस्त के घर में पड़े हो भाईजॉन ?
इतना पूछते ही पोल खुलने के डर से वे तुरन्त ऑफ़लाईन हो गये, आजतक दोबारा नही दिखे।
मैं सोच रहा हूँ, उनके दुकान मालिक और कई मित्र खुद ही करोड़पति हैं, लेकिन उनसे मांगने के बजाय वे मेरे जैसे चिरकुट के इनबॉक्स में ही क्यों घुसे और पेटीएम पर ही ट्रांसफर क्यों मांगा ? ,,,,और फिर दोबारा सम्पर्क क्यों नही किये?
बीस हजार रुपये अर्जेन्ट चाहिये:
अब दूसरे नामधारी फेसबुकिया मित्र की बात करते हैं। मेरी जानकारी के मुताबिक ये एक टेन्ट हाऊस के मालिक हैं, मने बहुत अच्छी आर्थिक स्थिति रखने वाले।
रात नौ बजे इनबॉक्स पधारकर बोले- भाई, बीस हजार रुपये अर्जेन्ट चाहिये। सुबह वापस मिल जायेगा।
मैने पूछा- ऐसा क्या हो गया?
बोले- पत्नी की तबियत खराब है?
मैं चौंका- इतने बड़े आदमी और बीस हजार नकद माँग रहे हैं? फिर भी मैने ये सोचा, शायद बड़ी दिक्कत ही होगी तभी यहाँ तक आये हैं। बोला- अभी तो मेरे पास नकद नही है। तुम ऐसा करो, अपने घर के पास वाले एमबीबीएस डॉक्टर त्रिपाठी साहब के अस्पताल में पत्नी को लेकर पहुँचो। मेरी बात करा दो। सारा इलाज शुरु हो जायेगा। पैसे की चिन्ता मत करो।
अब वे बोले- पैसा नकद नही चाहिये, इसी नम्बर पर सिर्फ पेटीएम द्वारा ट्रांसफर कर दो।
मैने उनसे भी कह दिया – मैं पेटीएम नही चला पाता भाई।
वे भी इतना सुनते ही तपाक से ऑफ़लाईन हो गये। दोबारा अब तक उनसे सम्पर्क नही हुआ।
तबसे बड़े टेंशन में हूँ । पत्रकार होने के बावजूद इन दोनों के परिवार से मुझे अब तक किसी के भी बीमार होने की कोई सूचना नही मिली। ईश्वर जाने क्या चक्कर है? मैने कई मित्रों से इसकी चर्चा किया तो कुछ लोगों ने बताया कि उनके पास भी इसी तरह कुछ लोग आकर मैसेजर द्वारा पैसे माँग रहे थे। कुछ ने बताया कि ये सोशल मीडिया पर उठाईगीरॉं एक गिरोह है जो आपसी मित्रों की फर्जी आई डी बनाकर पैसे ठग लेता है।तब से मैं अधिक सतर्क हँ।
आप सब भी ऐसे फर्जी इनबॉक्सियोँ से, घुसपैठियों से सावधान रहें। ऐसे किसी भी व्यक्ति के झांसे में आकर कोई मदद देने से पहले अच्छी तरह पड़ताल कर लें। कोई किसी समस्या के नाम पर आपको ठगने के लिये उल्लू तो नही बना रहा। हो सके तो ऐसे मामलों के बारे पुलिस से शिकयत जरूर करें।







