कटौने कुत्ते की तरह घेरने की रणनीति में सफल नहीं होगा चाइना

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Current Viral Issue: नवेद शिकोह

आपने ग़ौर किया होगा कि कटौने आवारा कुत्ते घेरने में माहिर होते हैं। ये घेरा बनाते हैं। एक भौंक कर दूसरों को सिग्नल देता है, दूसरा रास्ता रोकता है, तीसरा दूर तक दौड़ाता है और चौथा खामोशी से मोड़ पर खड़ा होकर काटने की तैयारी मे होता है।

जब कोई शख्स किसी परेशानी मे हो, दबाव मे हो, घबराया हुआ हो, हैरान-परेशान भटक रहा हो.. बोझ लादे हो या तेज रफ्तार में अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा हो तो ऐसे में आवारा कटौने कुत्ते उसे घेरते हैं। लक्ष्य बनाकर उसे नुकसान पंहुचाते हैं। रफ्तार में रुकवट डालना या परेशानी का नाजायज फायदा उठाना ऐसे कटौने कुत्तों की फितरत होती है।

ऐसी फितरत ही चीन की है। इसी ने सारी दुनिया में कोरोना वायरस फैलाकर बुरा वक्त पैदा किया, और अब अपने पड़ोसी भारत को परेशानी के वक्त घेरने की नाकाम और नाजायज कोशिश में लगा है।

लेकिन हम तप, तप और वृत के संस्कारों की शक्ति से तप कर कुंदन जैसे हो जाते हैं। जंगल में मंगल करना जानते हैं। आपदा को अवसर में बदलने का हुनर हमें आता है। संकट में संभावना तलाश लेते हैं। कोविड की मुश्किलों में भी हमारी ताकत का दुनिया ने लोहा माना है।

सबने तमाम मैराथन दौड़े देखी होंगी। बड़े बड़े ऐथलीट्स देखे होंगे। ऐसे विश्व विजेता भी ताजुब में पड़ गये जब उन्होंने देखा की हमारे देश के मजदूर और उनकै परिवार की बूढ़ी औरतों और बच्चों में ही इतनी ताकत है कि वो इस कोरोना काल की तमाम मुकिल़ो को रौंदते हुए दो-दो हजार किलोमीटर पैदल चल सकते हैं।

भारतीय सैनिकों की शौर्यपूर्ण, शक्ति और साहस की तो बात ही छोड़िये, हमारे देश की श्रम शक्ति मजदूर ही चाइना की तरफ कूच कर दें तो हम पूरे चीन को फतेह कर सकते हैं।

अंदेशा है कि चाइना ने कोविड को जन्म देकर दुनिया के उन देशों को चुनौती दी है जो विश्व शक्ति बनने की कतार मे है। ये उपलब्धि भारत जैसे बड़े और महान राष्ट्र को प्राप्त ना हो इसकी तैयारी में चीन ने भारत को घेरने की पहली कोशिश की। बार्डर पर छेड़खानी कर वो अपने देश को सर्वशक्तिशाली साबित करना चाहता है। इसके लिए उसने मास्टर प्लान पर काम किया।

उसका पहला उद्देश्य कोरोना वायरस में उलझा कर बार्डर पर भारत के थोड़े बहुत भू-भाग पर अवैध कब्जा कर वैश्विक खेमेबंदी कर विश्व युद्ध के आसार पैदा करने थे। कोरोना की फिलहाल कोई वैक्सीन तो है नहीं, बचने का सबसे बड़ा हथियार लॉकडाउन ही है। भारत जैसे इतनी बड़ी आबादी (जिसमें बड़ी संख्या में अशिक्षित हैं) में लम्बे समय तक सिर्फ पुलिस बल के सहारे लॉकडाउन लागू करवाना असंभव सा था। दुश्मन को उम्मीद थी कि यहां लॉकडाउन के लिए सिवीलियंस के बीच सेना लगा दी जायेगी। उसे शायद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता का अंदाज़ा नहीं था।

भारत के अत्यंत लोकप्रिय प्रधानमंत्री की लगातार अपीलें, पुलिस की कर्मठता और भारतीय नागरिकों के अनुशासन ने यहां लम्बे समय तक चले लॉकडाउन को सफल बना दिया। देश के शीर्ष नेतृत्व ने सेना लगाना मुनासिब नहीं समझा। भारतीय सेना लॉकडाउन में इंगेज हो जायेगी, चीन का ये मंसूबा पूरा नहीं हुआ।

प्लान के मुताबिक शत्रु ये भी चाह रहा होगा कि हमारी सेना लॉकडाउन में कोरोना के संक्रमण में भी कमजोर हो जाये। और वो ऐसे मौके पर सरहद पर मनमानी करे। भारत को कोरोना के संकट में बचाव से लेकर आर्थिक मोर्चे और सरहदों की हिफाजत में मुश्तैद देखकर ही चाइना ने कुंठा में आकर चीन ने लद्दाख घाटी में कायराना हिमाक़त को अंजाम दिया।

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