बैराज से कुड़ियाघाट गऊघाट तक नदी के दोनों किनारों पर जल कुम्भी का कब्जा
लखनऊ, 18 मई 2019: दिनभर पतंगबाजों का कुड़ियाघाट पर जमाववाड़ा रहता है और बगल में गोमती बहती है लेकिन लखनऊ की जीवनदायिनी कही जाने वाली गोमती के किनारे जलकुम्भी से पटी पड़ी है। बैराज से लेकर कुड़ियाघाट व गऊघाट तक दोनों ही किनारों पर जल कुम्भी का कब्जा है। इसके अलावा नदी में प्लास्टिक और धार्मिक कचरे की फैली गंदगी के बीच साफ़ पानी का दिखना भी चुनौती बना है! अभी गोमती को साफ करने के लिए एक सप्ताह पहले एनजीटी ने नगर विकास विभाग को कड़ी फटकार लगायी थी। जिसका असर अभी नहीं दिखा।

एनजीटी की फटकार के बाद भी नहीं जागे अधिकारी:
इस मामले में नगर विकास ने गोमती को साफ करने के लिए एनजीटी से 10 दिन की मोहलत मांगी थी। बता दें कि सिल्ट, गंदगी व जलकुम्भी की अधिकता के कारण गोमती की सांसे रुक रही हैं। जल कुम्भी के कारण पानी में आक्सीजन की मात्रा भी काफी कम हो जाती है। इससे मछलियों के साथ ही अन्य जलीय प्राणियों का जीवन संकट में है। गर्मी में पानी की कमी से गोमती बैराज पर घुलित आक्सीजन की मात्रा खतरनाक स्तर तक नीचे चली जाती है।

हालात यह हैं कि गऊघाट और कुड़ियाघाट को छोड़कर लखनऊ के किसी भी स्थान पर पानी इंसान के नहाने लायक भी नहीं रहा है। बैराज पर पानी इतना गंदा हो चुका है कि यहां जानवर भी नहाएं तो बीमार हो सकते हैं। पानी की किल्लत दूर करने के लिए प्रतिवर्ष शारदा नहर से गोमती में पानी छोड़ा जाता है। इस संबंध में शासन से आदेश है कि गोमती को प्रतिदिन 100 क्यूसेक पानी दिया जाए।
सिंचाई विभाग के अधिकारी कहते हैं कि उनकी पहली प्राथकिता पेयजल व किसानों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है। किसानों की मांग पूरी करने के बाद ही गोमती को पानी दिया जाएगा। पानी की कमी से नदी का बहाव कम हो जाता है। इससे कुम्भी व अन्य गंदगी नदी में ही जमी रहती है। पानी अधिक होने पर तेज बहाव में जल कुम्भी के साथ अन्य गंदगी भी बह जाती है।







