उपभोक्ता परिषद ने निजीकरण व बिजली सुधार मुद्दे पर ऊर्जामंत्री को सौपा सुधार प्रस्ताव

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ऊर्जामंत्री ने कहा गम्भीरता से विचार करेगी सरकार

पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को बिना निजीकरण किए उसमें व्यापक सुधार किए जाने को लेकर उपभोक्ता परिषद् लम्बे समय से अध्यन कर रहा था सभी तकनीकी व वित्तीय पहलुओ पर विचार करने पर इस निष्कर्ष पर पंहुचा कि पूर्वांचल बिजली क्षेत्र में सुधार की व्यापक संभावना है और पूर्वांचल एक ऐसी कंपनी है जहा पर अच्छा राजस्व प्राप्त किया जा सकता है पर एक प्रस्ताव लेकरं उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से लखनऊ के शक्ति भवन में मुलाकात कर एक चर्चा की और कहा कि पावर कार्पोरेशन ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के लिए अगले पांच वर्षो के लिए जो बिजनेस प्लान सौपा है। उस पर जबाबदेही तय करते हुए सख्ती से पारदर्शी व्यापक लागू कर प्रभावी योजना के तहत कार्य कराने का संकल्प सरकार करा ले तो बिना निजीकरण किये पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को सुधारा जा सकता है।

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए की विगत में उपभोक्ताओ को व्यापक सुधार का लाभ होगा के नाम पर टोरेंट पावर कंपनी व नोएडा पावर कंपनी को निजी हाथो में सौपा गया आज वह फेल साबित है। ऐसे में पुनः इस प्रकार का आत्मघाती कदम उपभोक्ताओ को तबाह कर देगा इसलिए इस पर विराम लगना बहुत जरूरी है

पूर्वांचल बिजनेस प्लान में पांच सालो में हर साल एक कैपिटल खर्च अनुमानित करते हुए जो अलग अलग सालो में सुधार के बाद वितरण हनिया प्रस्तावित है वह निम्न है जिस पर कार्य करने की आवश्यकता है –

प्रदेश के ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा ने उपभोक्ता परिषद् के प्रस्ताव पर गम्भीरता से चर्चा करने के बाद उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष से कहा कि सरकार उपभोक्ता हित में इस पर गम्भीरता से विचार करेगी।

उपभोक्ता परिषद् अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि पावर कार्पोरेशन द्वारा विगत फरवरी 2020 में विद्युत नियामक आयोग में सभी बिजली कम्पनियो का 5 वर्ष का वर्ष 2020-21 से लेकर वर्ष 2024-25 तक बिजनेस प्लान फाइल किया है जिसमे 5 वर्षो में वितरण हानिया 15 प्रतिशत तक लाने के लिए होने वाले प्लान पर अलग अलग सालो का कैपिटल कॉस्ट वा प्रस्तावित खर्च सौपा है जिसमे कहा है पूर्वांचल विद्युत वितरण में सुधार के वयापक कार्यक्रम चलाए जा रहे है जिसमे अंडर ग्राउंड केबलिंग, स्मार्ट मीटरिंग ऑडिट सीटीपीटी कृषि फीडर फीडर मीटरिंग ईआरपी स्कीम प्रीपैड मीटरिंग बिजली चोरी पर अभियान प्रमुख है और इसमे से अनेको काम शुरू हो गये है और उस पर पूरे पांच साल में 8 हजार 801 करोड़ रुपया खर्च होना है जिसमे 7 हजार 126 करोड़ केंद्रीय सेक्टर से अनुदान है । ऐसे में जब करोड़ो खर्च हो रहा तो फिर पूर्वांचल को उद्योगपतियो को देने की तैयारी क्यों ? वास्तव में सरकार को सुधार करने के लिए अभियंता कार्मिको की जबाब देही तय करने के साथ उन पर पैनी नजर रखना चाहिए और उन्ही पर सुधार की जिम्मेदारी देना चाहिए।

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