महंगी बिजली दर की सुनवाई में उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा, किसानों का चक्का जाम आयोग हुआ परेशान

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  • उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष के सवालों के सामने सभी की बोलती बंद कहा हमारे सवालों का किसी के पास नही जवाब बिजली दर बढोत्तरी पूरी तरह हो खारिज
    बिजली विभाग के कार्मिकों पर सवाल खडा करते हुये कहा कि अपनी तनख्वाह से 1 एसी का पैसा कटाते हैं और घर में 5 से 10 एसी लगा रखते हैं जो बिजली चोरी की श्रेणी मे आता है: उपभोक्ता परिषद

लखनऊ,18 जुलाई 2019: प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में पावर कारपोरेशन द्वारा प्रस्तावित भारी बढोत्तरी पर आज उप्र विद्युत नियामक आयोग मंे आयोग अध्यक्ष श्री आर पी सिंह व सदस्य श्री के के शर्मा की उपस्थित में आम जनता की सार्वजनिक सुनवाई सम्पन्न हुयी जहाॅं एक तरफ सैकडों की संख्या में उपभोक्ताओं ने व्यापक बढोत्तरी का विरोध किया वहीं दूसरी तरफ आयोग के बाहर किसानों ने पूरे नियामक आयोग को घेर रखा था। आयोग के अन्दर सभागार में सुनवाई प्रातः 11ः30 बजे शुरू हुयी जिसमें पावर कारपोरेशन की तरफ से बढोत्तरी पर एक प्रजेन्टेशन दिया गया उसके तुरन्त बाद उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने स्वयं मोर्चा संभाला। उपभोक्ता परिषद ने लगभग 10 पन्नों का अपना लिखित प्रस्ताव भी आयेाग को सौंपा जिसमें विस्तृत वह तथ्य मोजूद है जिसके माध्यम से बिजली दरों में कमी करने का सबूत पेश किया गया।

प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से व्यापक बिजली दर बढोत्तरी का विरोध करते हुये राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने अपनी बात रखते हुये कहा दुर्भाग्य की बात है आज जिस टैरिफ प्रस्ताव व ए आर आर पर चर्चा हो रही है  उसको पावर कारपोरेशन द्वारा 5 बार बदला गया है इससे इनके फर्जी आंकडों की पोल खुलती है। जिस प्रकार से आयोग की एक फटकार पर पूरा ए आर आर रूपया 1321 करोड कम हो गया। आयोग दो चार फटकार और लगाता तो पूरा गैप ही खत्म हो जाता। उन्होंने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष व प्रमुख सचिव ऊर्जा दिन भर शक्ति भवन में बैठे रहते है आज यहाॅं सुनवाई में नजर नही आ रहे है। जो गंभीर मामला है। वितरण हानियाॅं 11.96 बतायी गयी है। जबकि 25 से 30 प्रतिशत आज भी हैं । उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने तंज कसते हुये कहा सरकार बहुत बिजली थाने खुलवा रही है एक थाना यहाॅं आयोग में खुलवा देना चाहिये और जैसे बिजली कम्पनियों के उच्चाधिकारी फर्जी आंकडा पेश करें उन्हें भी एफआईआर कर बंद कराना चाहिये।

उपभोक्ता परिषद ने कहा जब आयोग द्वारा उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियांे पर 11852 करोड निकाल दिया गया है ऐसे में बिजली दर बढांेत्तरी तुरन्त खारिज होनी चाहिये। उपभोक्ता परिषद ने गैप के बाद उपभोक्ताओं के बचे 3851 करोड के एवज में घरेलू उपभोक्ताओं के फिक्स चार्ज समाप्त करने और उनकी दरों में कटेगिरी वाइज कमी का एक स्लैब भी आयोग को सौंपा। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने देश के दर्जनों राज्यों का तुलनात्मक आंकडा पेश कर यह सिद्ध किया कि प्रदेश में पहले से बिजली दरें ज्यादा हैं। बीपीएल गरीब उपभोक्ताओं की दरों में 109 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित कर टैरिफ शाक दिया गया है। सौभाग्या के लिये अलग कटेगिरी की मांग उठायी है। उपभोक्ताओं के परिसर पर लग रहे 2जी मीटर पर भी सवाल उठाते हुये उपभोक्ता परिषद ने सबकी बोलती बंद कर दी और कहा चलते मीटर उतारकर करोडों का घोटाला किया गया। आगे जब देश के 24 घण्टे आपूर्तित शहरी क्षेत्रों की बिजली कटौती का राज्यवार डाटा पेश किया तो उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा बिजली कटौती सामने आयी।

उपभोक्ता परिषद ने 10 करोड से ऊपर सभी खर्चों जिसपर आयोग से अनुमति नही ली गयी है उसे खारिज करने आर ओ ई 16 प्रतिशत को समाप्त करने  व मोटी तनख्वाह पाने वाले अभियन्ताओं को लाखों इनाम देने का मुददा उठाया। उपभोक्ता परिषद ने बिजली विभाग के कार्मिकों पर सवाल खडा करते हुये कहा कि अपनी तनख्वाह से 1 एसी का पैसा कटाते हैं और घर में 5 से 10 एसी लगा रखते हैं जो बिजली चोरी की श्रेणी मे आता है। उपभोक्ता परिषद ने बकाये पर कनेक्शन एक रसीद पर अनेकों भुगतान सहित बिजली विभाग में करोडों अरबों के अनेकों घोटालों का खुलासा किया।

पूरे हाल में तब सन्नाटा छा गया जब उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन की एक मीटिंग की वीडियो क्लिप दिखाते हुये कहा देखिये यह लोग कितनी सीरियस बैठक करते हैं कि इनकी मीटिंग में घोस्ट उपभोक्ताओं का सत्यापन पर चर्चा हो रही है यानि उपभोक्ताओं को भूत प्रेत भी बनाया जा रहा है जो अपने आप मे संवदेनशीलता को दर्शाता है। बिजली कम्पनियों की खराब रेटिंग पर सवाल खडा करते हुये कहा यह 100 में 20 नम्बर भी नही पाते।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा पावर कारपोरेशन में यह कुछ आंकडे पेश करते हैं विद्यान सभा में कुछ और आयोग में कुछ। इससे यह सिद्ध होता है यह सब फर्जी आंकडों पर उपभोक्ताओं की दरें बढाने पर आमादा रहते हैं। प्रदेश में विद्युत दुर्घटनाओं सहित प्राइमरी स्कूलों में आज तक बिजली न पहुच पाने का मुददा उठाया गया।

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