- ‘‘वन नेशन वन ग्रिड‘‘ का सपना तो 31 दिसम्बर 2013 को हो गया था पूरा? कैसे मिलेगी सबको सस्ती बिजली?
- सस्ती बिजली देने का नारा सिर्फ दिखावा प्रदेश के गरीब शहरी बीपीएल की बिजली दरों में 109 प्रतिशत की प्रस्तावित बृद्धि इसका सबसे ताजा उदाहरण
लखनऊ,05 जुलाई 2019: विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में देश की माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2019 का जो बजट आज लोकसभा में पेस किया उससे ऊर्जा क्षेत्र को निराशा हाथ लगी है। वित्त मंत्री द्वारा यह कहा गया कि ‘‘वन नेशन वन ग्रिड‘‘ के तहत देश में सस्ती बिजली उचित दामों मे पर हर घर को दिलाने के लिये जल्द ही एक रोडमैप जारी होगा।
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि ‘‘वन नेशन वन ग्रिड‘‘ का तो सपना 31 दिसम्बर 2013 को पूरा हो चुका है जब सभी ग्रिड एक हो गयी थी। उसके आधार पर लम्बे समय से देश के विद्युत उपभोक्ताओं को इंतजार इस बात का है कि देश के उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली कब मिलेगी। उत्तर प्रदेश में तो उल्टा हो गया, विगत दिनों जो सबसे गरीब बीपीएल शहरी उपभोक्ता है उसकी दरों में 109 प्रतिशत प्रस्तावित बृद्धि इसका प्रमाण है कि नारा देना अलग बात है और उसका क्रियान्वयन अलग बात है। ऐसे में सस्ती बिजली का सपना दिखाकर प्रदेश के गरीबो को लालटेन युग में ले जाने की कोशिश बिजली विभाग कर रहा है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व उर्जा कौन्सिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा इस बजट में यह उम्मीद थी कि सौभाग्या योजना में जिन बीपीएल लाखों परिवारों को बिजली दी गयी उनके लिये सस्ती दरों पर बिजली की बात होगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं दिखा। इसी प्रकार पूरे देश में निजी घरानों की मंहगी बिजली पर अंकुश लगाने की दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ। बजट भाषण में उदय स्कीम की नीति आयोग द्वारा समीक्षा पर कहा गया कि वर्ष 2018-19 में 9वें महीने तक सरकारी विभागों व निकायों पर देश के बिजली डिस्कामों का लगभग 41386 करोड़ बिजली बकाया है इस पर कोई ठोस बात नहीं की गयी। इसी प्रकार राज्यों के उत्पादन गृहों को मजबूत करने की दिशा में कोई ठोस पहल न होने से ऊर्जा क्षेत्र को निराशा हाथ लगी है।
वित्त मंत्री द्वारा विद्युत क्षेत्र के बिजली दर के संरचनात्मक सुधारों पर जल्द घोषणा की बात की गयी लेकिन गरीबों किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं जिनके लिये बिजली आवश्यकता है उनके लिये अनिवार्य रूप से सब्सिडी देकर सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में कोई भी ठोस प्रयास नहीं किया गया, जिससे बिजली क्षेत्र को जो अपेक्षायें थी उससे निराशा हाथ लगी है।






