गोलू देवता में लोगों की आस्था आज भी बरकरार है। कहते हैं की अदालत का खर्च वहन नहीं कर पाने वाले तथा अन्याय, क्लेश व विपदा से पीड़ित लोगों की इस मंदिर में मनौती मांगने वालों की मुराद आज भी पूरी होती है
चितई में भी गोलू देव का मंदिर स्थित है। यह मंदिर अल्मोड़ा से छह किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ मोटर मार्ग के समीप है। सड़क से चंद कदमों की दूरी पर ही एक ऊंचे तप्पड़ में गोलू देवता का भव्य मंदिर बना हुआ है। मंदिर के अंदर घोड़े में सवार और धनुष बाण लिए गोलू देवता की प्रतिमा है। मंदिर परिसर में हरे-भरे पेड़, टंगी हुई असंख्य छोटी-बड़ी घंटियां और अर्जियां लोगों को आकर्षित करती हैं।
मूल मंदिर के निर्माण के संबंध में हालांकि कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, पर पुजारियों के अनुसार 19वीं सदी के पहले दशक में इसका निर्माण हुआ था। तमाम आधुनिकताओं के बावजूद स्थानीय लोगों का गोलू देवता पर आस्था बरकरार है। अदालत का खर्च वहन नहीं कर पाने वाले तथा अन्याय, क्लेश व विपदा से पीड़ित लोग इस मंदिर में अपनी पुकार लगाने व मनौती मांगने प्रतिदिन आते रहते हैं।
मंदिर के अंदर और बाहर सैकड़ों की तादाद में लगे स्टांप और आवेदन पत्र इसकी गवाही देते हैं। गोलू देवता के दरबार में अधिकतर कानूनी मुकदमे, न्याय, व्यवसाय, स्वास्थ्य, मानसिक परेशानी, नौकरी, गलत अभियोग,जमीन जायदाद व मकान निर्माण से जुड़े विषयों पर अर्जियां लगाई जाती हैं। मनौती पूर्ण होने लोग मंदिर में अपनी सामर्थ्य के अनुसार घंटियां चढ़ाते हैं। आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग उनके इस न्याय को स्वीकार करता है। इस मंदिर में सारे साल कभी भी आकर पूजा की जा सकती है।
देश ही नहीं विदेश से भी लोग आकर मन्नत मांगते हैं और कई चमत्कारों को देख कर विदेशी नत – मस्तक हो जातें हैं। वास्तव में यह एक चमत्कार से कम नहीं है की एक मनुष्य अपनी सारी समस्याओं का हल एक ही ईश्वर एक ही बार में कर देता है। जब भी आप परेशान हो तो सिर्फ एक बार गोलू देवता से प्रार्थना अवश्य कीजियेगा।







