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    गुजरात बम धमाकों में भला 100-200 सरकारी गवाहों की जरूरत क्या है: सुप्रीम कोर्ट 

    ShagunBy ShagunApril 16, 2018 इंडिया No Comments4 Mins Read
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    सुप्रीम कोर्ट ने उठाये सवाल: आप हमेशा संख्या में ही क्यों विश्वास करते हैं? हरेक मामले में 100-200 सरकारी गवाह होते हैं। कल भी एक दुर्घटना का मामला आया था जिसमें कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। लेकिन करीब 200 सरकारी गवाहों के नाम दर्ज कराए गए थे। हमें आश्चर्य होता है कि इतने सारे गवाह क्यों बनाए जाते हैं?


    नई दिल्ली,16 अप्रैल। वर्ष 2008 के गुजरात श्रृंखलाबद्ध बम धमाकों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जांच एजेंसियां हमेशा संख्या बल पर क्यों यकीन करती हैं? वह अदालत में अपने आरोपों को साबित करने के लिए सैकड़ों गवाहों को पेश करती हैं। भला 100-200 सरकारी गवाहों की जरूरत क्या है? सरकारी वकील के यह कहने पर कि वह इस मामले में कुछ हिदायतें लेंगे, कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 3 मई तय कर दी।

    गुजरात के बम ब्लास्ट में अभियोजन पक्ष ने 1500 से अधिक सरकारी गवाहों के नाम दर्ज कराए हैं। इस बम ब्लास्ट में आरोपित प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) के कुछ आतंकियों की जमानत पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की है। 10 साल पहले गुजरात के अहमदाबाद शहर में महज 1 घंटे के अंदर 21 बम धमाके हुए थे। इस आतंकी हमले में 56 लोगों की जान गई थी और 220 से अधिक लोग घायल हुए थे।

    जस्टिस एके सिकरी और अशोक भूषण की खंडपीठ ने कहा कि आप हमेशा संख्या में ही क्यों विश्वास करते हैं? हरेक मामले में 100-200 सरकारी गवाह होते हैं। कल भी एक दुर्घटना का मामला आया था जिसमें कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। लेकिन करीब 200 सरकारी गवाहों के नाम दर्ज कराए गए थे। हमें आश्चर्य होता है कि इतने सारे गवाह क्यों बनाए जाते हैं? खंडपीठ को बताया था कि बम धमाकों के मामले में गुजरात पुलिस ने पहले ही करीब 930 सरकारी गवाह बनाए थे। इसके आधार पर ही सुनवाई अदालत ने गवाही दर्ज कराई। इस अदालत में अभी कुछ और गवाहों के बयान दर्ज होने शेष हैं।

    इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, क्या वाकई में इतने सरकारी गवाहों की जरूरत है? इस पर एएसजी मेहता ने कहा कि पुलिस ने खुद ही 257 सरकारी गवाहों को वापस कर दिया है, लेकिन 175 प्रमुख सरकारी गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज होना बेहद जरूरी है। 26 जुलाई, 2008 तो अहमदाबाद बम धमाकों से हिल गया था। इसके अलावा, सूरत में 15 जिंदा बम पाए गए थे, जिन्हें फटने से पहले निष्क्रय कर दिया था।

    उन्होंने बताया कि इस मामले में 90 से अधिक आरोपित थे। इनमें से केवल 84 आतंकियों की गिरफ्तारी हो सकी और 10 फरार हैं। गिरफ्तार किए इन 84 आरोपितों में से केवल दो जमानत पर बाहर हैं और बाकी 82 आरोपित जेल में हैं। इस बीच, बचाव पक्ष के वकील ने जमानत की अर्जी देने वाले इंडियन मुजाहिदीन के सदस्यों की ओर से कहा कि 931 सरकारी गवाह अब तक पेश किए हैं और किसी ने भी जमानत की अपील करने वाले आरोपितों के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा है।

    बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि राजस्थान में ऐसे ही एक अन्य मामले में आरोपितों को बरी किया है। इन आरोपितों पर आतंकी शिविरों में जाकर प्रशिक्षण लेने का भी आरोप दर्ज है। एएसजी ने जब खंडपीठ ने मेहता से राजस्थान अदालत के फैसले के बारे में कहा कि हम तथ्यों का पता करके अदालत को इसकी जानकारी देंगे। एएसजी मेहता ने खंडपीठ को बताया कि इन आरोपितों पर आरोप है कि पहले यह सिमी के सदस्य थे, लेकिन सरकार के उस पर प्रतिबंध लगाने के बाद यह आरोपित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई अभी अहम मोड़ पर है और इसके पूरे होने में अभी और 15 महीने लग सकते हैं।

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