गंगा की रेती पर बना दिये सैकड़ों शवों के टीले, बाढ़ आने पर फिर होगा संक्रमण बढ़ने का खतरा

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उन्नाव के रौतापुर गंगा घाट में गंगा की रेती पर दफनाए गए शव तथा उन टीलों का निरीक्षण करते अधिकारी

बलिया गाजीपुर के बाद अब उन्नाव में दिखी भयावह स्थिति, अंतिम संस्कार में प्रयोग होने वाली वस्तुओं के बढ़े मुंहमांगे दाम, कालाबाजारी पे समय रहते लग जाती लगाम तो नहीं पनपती ऐसी भयावह स्थितियां

लखनऊ, 14 मई, 2021: देश में कोरोना की दूसरी लहर मौत का कहर लेकर आयी है। देश में बहुत ही भयावह स्थिति बन गई है , लेकिन सरकारों का कहना है कि स्थिति में सुधार जल्द हो जायेगा। बहुत से लोग ठीक भी हो रहे हैं। वहीं यूपी से कुछ ऐसी तस्वीरें आयीं हैं जिसमें स्थितियाँ और भयावह दिखने लगती हैं। इसी सोमवार को यूपी के बलिया और गाजीपुर जिले में तथा बिहार के बक्सर में गंगा नदी पर बह रहे सैकड़ों शवों को देख लोग भय से व्याप्त हो गये और शासन व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गये।

दो दिन बाद यूपी के उन्नाव जिले के शुक्लांगज में ही कई शवों को गंगा नदी में बहते देखा गया। कई शवों को गंगा की रेती में ही दफना दिया गया है। वहां रेती के बहुत से टीले बने नजर आ रहे हैं।

शवों को मुख्य रूप से हाजीपुर इलाके के रौतापुर गंगा घाट पर दफनाया गया। बुधवार को 16 शवों में 13 शवों को रेती में दफनाया गया। बताया जा रहा है लगभग 20 दिनों से लगभग चार सौ शवों को गंगा की रेती में दफनाया जा चुका है।

स्थानीय लोग बताते हैं कि आस-पास के लगभग दो दर्जन गाँव के लोग अपने परिचितों तथा अपने परिवारीजनों को जिनकी मौत कोरोना या अन्य बीमारी से इस बीच हुई है उनका दाह संस्कार नहीं कर पाये क्योंकि श्मशान घाट में जगह के आलावा दाह संस्कार का पैकेज काफी महँगा हो गया है। कालाबाजारी चरम पर है। प्रशासन इस कालाबाजारी पर समय रहते लगाम लगा लेता, तो शायद ऐसी भयावह स्थिति नहीं बनती। कोरोना काल के इस बेरोजगारी के दौर में उन ग्रामीणों के लिये 20 से 30 हजार का यह पैकेज पहाड़ सा बोझा लग रहा था। हिंदू रीति रिवाज में अंतिम संस्कार की एक अन्य विधि नदी में शवों को प्रवाहित करना भी है। लेकिन ग्रामीणों के नसीब में यह भी नहीं था , कई जगह गंगा में पानी कम होने के कारण मृतकोों अंतिम संस्कार भी सही से नसीब नहीं हो रहा। शवों को दिल में पत्थर रखकर गंगा की रेती में ही दफना दिया गया।

रेती में दफनाये इन शवों को लेकर स्थानीय लोगों में और प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। क्योंकि एक माह के बाद मानसून आने के बाद ये सारे शव रेती से बाहर निकल फिर नदी में उतराने लगेंगे। जिससे संक्रमित शवों के कारण फिर कोई बड़ी विपदा न आये।

उन्नाव के जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने कहा, “कुछ लोग शव नहीं जलाते बल्कि नदी द्वारा रेत में दफन कर देते हैं। मुझे जानकारी मिलने के बाद, मैंने अधिकारियों को घटनास्थल पर भेज दिया है। मैंने उनसे पूछताछ करने के लिए कहा है। कार्रवाई करें।”

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