- ऊर्जा मन्त्री से शिकायत के बाद भी बिजली कम्पनियों ने गुप-चुप तरीके से सरचार्ज समाधान योजना में अधिक राजस्व वसूली करने वाले अभियन्ताओं को बाँटा गया मोटा ईनाम
उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री से उठायी माँग, अविलम्ब सरकार ऐसे उच्चाधिकारियों के खिलाफ उठाये कठोर कदम
लखनऊ, 31 मई 2019: जब पूरा प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में है और अनेकों जगह जर्जर लाइन व ओवरलोडिंग के चलते आम उपभोक्ताओं को अनेकों जिलों में सुचारू रूप से तय शिड्यूल से बिजली नहीं मिल पा रहा है, वहीं बिजली विभाग के अभियन्ताओं, जो सभी विभागों से कहीं ज्यादा मोटी तनख़्वाह ले रहे हैं उन्हें बिजली कम्पनियों के प्रबन्ध निदेशकों व अभियन्ताओं द्वारा गुप-चुप तरीके से सरचार्ज समाधान योजना में राजस्व अर्जित करने के लिए रू0 1 लाख, 75 हजार व 50 हजार का इनाम बँटना शुरू हो गया है, जबकि विगत् दिनों इस पूरे मामले को लेकर उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के ऊर्जा मन्त्री को लिखित शिकायत करते हुए इस पर रोक लगाने की माँग की गयी थी और यह मुद्दा उठाया गया था कि जब तक बिजली कम्पनियाँ फायदे में न पहुँच जायें इस प्रकार की फिजूलखर्ची का कोई मतलब नहीं है, और जब अच्छे काम के लिए कैश में इनाम दिया जा रहा है तो खराब काम करने वालों से कैश में वसूली क्यों नहीं?
उपभोक्ता परिषद के अनुसार वहीं उपभोक्ताओं को मानक के अनुसार अनेकों सुविधायें न देने के लिए नियामक आयोग द्वारा तय रू0 50 से रू0 100 का मुआवजा देेने के लिए विभाग के पास पैसा नहीं है। वहीं लाखों रूपये बाँटने के लिए कोई दिक्कत नहीं है, वह भी तब, जब ऊर्जा मन्त्री ने पूरे मामले पर कार्यवाही के लिए अध्यक्ष, पावर कार्पोरेशन को मामला संदर्भित किया था। हद तो तब हो गयी, जब इस भीषण गर्मी में ब्रेक डाउन में जनता को राहत देना प्रमुख मुद्दा है तो वहीं प्रबन्ध निदेशक, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा ट्विटर पर इनाम की फोटो डाली जा रही है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि हर वित्तीय वर्ष में 10 हजार से 12 हजार करोड़ का गैप आ रहा है, वहीं बिजली कम्पनियों का अब तक कुल घाटा 85 हजार करोड़ के ऊपर पहुँच गया है वहीं अपने काम के बदले मोटी तनख़्वाह लेने वालों को इनाम बाँटा जाना पूरी तरह गलत है। उपभोक्ता परिषद प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी व ऊर्जा मन्त्री से यह माँग करती है कि फिजूलखर्ची करने वाले उच्चाधिकारियों के खिलाफ़ तत्काल कठोर कदम उठाया जाये, अन्यथा की स्थिति में प्रदेश की जनता में एक गलत संदेश जायेगा।
उपभोक्ता परिषद ने उठाएं सवाल:
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पहले उपभोक्ताओं की वसूली न करके उनके बिल को बढ़ने दिया जाता है और फिर उनकी वसूली सरचार्ज समाधान योजना के तहत करके अभियंताओं को कैश में इनाम बाँटा जाता है जो पूरी तरह गलत है और कहीं न कहीं इसका खामियाजा बिजली दरों में बढ़ोत्तरी के रूप में प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ता है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है जब अधिक राजस्व अर्जित करने पर कैश में इनाम बाँटा जा रहा है तो जो लोग खराब कार्य कर रहे हैं उनसे कैश में रिकवरी क्यों नहीं हो रही है? बिजली आवश्यक सेवाओं का अंग है उसे प्राइवेट कम्पनी की तरह चलाकर जनता पर भार डालना पूरी तरह गलत है।







