स्टिंग करने वाले पत्रकार को ब्लैकमेलर नहीं कहा जा सकता ! 

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प्रसार भारतीय के अधीन लखनऊ दूरदर्शन केंद्र में स्टिंग आॅपरेशन पर आधारित कार्यक्रम किया गया था -‘तीसरी आंख’ शुरु 
लखनऊ, 09 नवंबर 2018: क्या आप जानते हैं कि भारतीय पत्रकारिता में स्टिंग ऑपरेशन को बढ़ावा सरकार ने ही दिया था। वो भी भाजपा सरकार ने। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान भारत सरकार के प्रसार भारतीय के अधीन लखनऊ दूरदर्शन केंद्र में स्टिंग आॅपरेशन पर आधारित कार्यक्रम -‘तीसरी आंख’ शुरु किया गया था। प्रभु झिंगरन नामक दूरदर्शन के एक अधिकारी ने यह कार्यक्रम शुरू किया था। यह बहुत पसंद किया और काफी लोकप्रिय हुआ। और फिर श्री झिंगरन लखनऊ दूरदर्शन केंद के निदेशक बना दिये गये थे।
गैर सरकारी न्यूज चैनलों के आगे फिसड्डी हो रहे दूरदर्शन को तीसरी आंख ने पिछड़ेपन से बाहर निकाला। ये आम धारणा दूर हुई कि सरकारी मीडिया लकीर की फकीर है। सरकार की सकारात्मक खबरों के जरिए सरकार के इशारों पर खबरें दिखाने के अलावा इसमें कुछ नया नहीं होता। सरकारी मीडिया सरकार या सरकारी विभाग की नकारात्मक या आलोचनात्मक खबरों से परहेज करती रही है।
लखनऊ दूरदर्शन ने तीसरी आंख में सरकारी विभागों को बारी-बारी से बेनकाब किया। यह देखकर गैर सरकारी चैनलों को स्टिंग ऑपरेशन करने का हौसला मिला। प्रतिस्पर्धा वश भी कई न्यूज चैनलों ने खोजी खबरों की दुनिया में स्टिंग ऑपरेशन का रिवाज बढ़ाया।
इसलिए स्टिंग ऑपरेशन को आधार बनाकर किसी पत्रकार या चैनल को ब्लैकमेलर कैसे कहा जा सकता है।
तो क्या अतीत में सरकारी मीडिया (दूरदर्शन) ने ब्लैकमेलिंग के लिए तीसरी आंख जैसे कार्यक्रम का रिवाज तेज किया था !
– नवेद शिकोह

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