चुनौती है जान एलेन के शव को खतरनाक आदिवासियों के द्वीप से वापस लाना?

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  • खतरनाक आदिवासियों ने जॉन एलेन को तीरों से मार डाला था
  • अपने अंतिम खत में जान एलेन लिखा था: मैं वापस न आऊं तो मेरे मरने का दोष भगवान् को मत देना

नई दिल्ली, 24 नवंबर 2018: अपने धर्म से परिचय कराने और आधुनिक मानव सभ्यता से जोड़ने के उद्देश्य से अंडमान के उत्तरी सेंटेनियल दीप पर बसे सबसे खतरनाक आदिवासियों के पास गये अमेरिकी नागरिक जान एलेन चाउ के शव का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया हैं जोकि आधुनिक मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

बता दें कि अंडमान के उत्तरी सेंटेनियल दीप पर आदिवासियों के हाथों अमेरिकी नागरिक जान एलेन चाउ 27 वर्ष के मारे जाने के बाद, अब सबसे बड़ा चैलेंज है। उसके शव को हासिल करना। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अभी तक जो भी टीम आयरलैंड के करीब गई वह न तो शव वाली जगह को ढूंढ पाई है, और न ही शव का कोई पता लगा पायी है।

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अंडमान के डीजीपी दीपेंद्र पाठक ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि यहाँ के आदिवासियों के बारे में कई बातें प्रचलित हैं जैसे वह इंसान के मरने के बाद कुछ दिन तक शव को रेत में दबा देते हैं, और फिर उसे निकाल कर अपने तरीके से दफनाते हैं।

कई प्राचीन मानव व्यवहार पर अध्ययन कर चुके जानकार टीएन पंडित का कहना है कि अगर नारियल और कुछ लोहे के टुकड़े के साथ थोड़ी सावधानी बरती जाये तो आदिवासियों के करीब जाकर शव को लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दोपहर या शाम के समय जब वह तट पर नहीं आते उस वक्त यह चीजें लेकर वहां जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह खुद एक समय इन आदिवासियों से संपर्क कर चुके हैं।

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बता दें कि जान को आयरलैंड के पास तक पहुंचाने वाले मछुआरों ने बताया था कि उन्होंने 17 नवंबर की सुबह कुछ आदिवासियों को रस्सी से बाँध कर कुछ ले जाते हुए देखा था ये सम्भवता जान का शव भी हो सकता है और आकार और कपड़ों से वह जान का ही शव लग रहा था।

जब तीर चाऊ की बाइबल में लगा:

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अंडमान में संरक्षित जनजातियों द्वारा हत्या किये जाने से कुछ घंटों पहले अमेरिकी नागरिक जॉन एलन चाऊ तीर से किये गए एक हमले में बाल-बाल बच गया, जब एक आदिवासी द्वारा चलाया गया तीर चाऊ की बाइबल में लगा। उसकी डायरी में लिखी बातों से इसका खुलासा हुआ। प्रतिबंधित नॉर्थ सेंटीनल द्वीप में प्रवेश की कोशिश के दौरान आदिवासियों के हाथों मारे गए चाऊ के हाथ से लिखे नोट्स में इस बात का भी जिक्र है कि वह यीशू के संदेश के साथ आदिवासी लोगों के साथ रूबरू होना चाहते थे।

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