पॉक्सो एक्ट में क्या बदलाव
नई दिल्ली, 11 जुलाई 2019: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कई महत्वपूर्ण फैसले किए। इनमें बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) कानून में संशोधन से लेकर अनियंत्रित जमा योजना पाबंदी विधेयक को मंजूरी भी है, जो इससे संबंधित अध्यादेश का स्थान लेगा।
बाल यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए केन्द्रीय कैबिनेट ने बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) कानून को कड़ा करने के लिए इसमें संशोधनों को मंजूरी दे दी। प्रस्तावित संशोधनों में बच्चों का गंभीर यौन उत्पीड़न करने वालों को मृत्युदंड तथा नाबालिगों के खिलाफ अन्य अपराधों के लिए कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। इसमें बाल पोनरेग्राफी पर लगाम लगाने के लिए सजा और जुर्माने का भी प्रावधान शामिल है।
सरकार ने कहा कि कानून में शामिल किए गए मजबूत दंडात्मक प्रावधान निवारक का काम करेंगे। सरकार ने कहा, ‘इसकी मंशा परेशानी में फंसे असुरक्षित बच्चों के हितों का संरक्षण करना तथा उनकी सुरक्षा व गरिमा सुनिश्चित करना है। संशोधन का उद्देश्य बाल उत्पीड़न के पहलुओं तथा इसकी सजा के संबंध में स्पष्ट प्रावधान लेकर आने का है।’
सरकार ने एक बयान में कहा कि पॉक्सो कानून, 2012 की धाराओं 2, 4, 5, 6, 9, 14, 15, 34, 42 और 45 में संशोधन किए जा रहे हैं।
इसके अलावा इन विधेयक को भी मिली मंजूरी:
अनियंत्रित जमा योजना पाबंदी विधेयक को मंजूरी: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को अनियंत्रित जमा योजना पाबंदी विधेयक, 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी। यह विधेयक 21 फरवरी को लागू अनियंत्रित जमा योजना पाबंदी अध्यादेश, 2019 का स्थान लेगा। सरकार का कहना है कि यह विधेयक देश में अवैध रूप से जमा किए जा रहे धन के प्रभाव से निपटने में मदद करेगा।
रेलवे सुरक्षा बल सेवा को संगठित समूह ’क‘‘ का दर्जा:
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को रेलवे सुरक्षा बल सेवा को संगठित समूह ‘‘क’ का दर्जा देने को मंजूरी प्रदान कर दी। सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि आरपीएफ को संगठित समूह ‘‘क’ सेवा का दर्जा प्रदान करने से सेवा में ठहराव खत्म होगा, अधिकारियो की कैरियर प्रगति में सुधार होगा और उनका प्रेरणात्मक स्तर कायम रहेगा। आरपीएफ के योग्य अधिकारी लाभान्वित होंगे।
अंतरराज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) विधेयक को मंजूरी:
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को अंतरराज्यीय जल विवादों को कुशलता पूर्वक और तेजी से निपटाने के लिए अंतरराज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) विधेयक 2019 को मंजूरी दे दी। सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह अंतरराज्यीय नदी जल विवादों के न्यायिक निर्णय को और सरल तथा कारगर बनाएगा। इस विधेयक को अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 में संशोधन करने के लिए लाया जा रहा है। न्यायिक निर्णय के लिए कड़ी समय-सीमा निर्धारण और विभिन्न पीठों के साथ एकल न्यायाधीकरण के गठन से अंतरराज्यीय नदियों से संबंधित विवादों का तेजी से समाधान करने में मदद मिलेगी।







