बांग्लादेश बॉर्डर पर ऑफिसर ने मानसिक विक्षिप्त युवक को बचाया मानव तस्करों से, कराई सकुशल घर वापसी

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  • बीएसएफ के जवान और आईआरएस अफसर की सक्रियता ने विक्षिप्त युवक को उनके परिजनों तक पहुँचाया
  • मानसिक विक्षिप्त युवक को मानव तस्कर गिरोह से बचाया आईआरएस अफसर ने, दूसरे देश में ले जाकर अंग निकालकर बेचने की थी योजना, कराई सकुशल घर वापसी 
बाँदा, 05 अप्रैल 2019: अपनी ठेठ भाषा और अख्खड़ता के लिये प्रसिद्ध बाँदा किसी न किसी रूप में मानवता की मिसाल भी पेश कर जाता है। अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर आकर किसी अंजान गाँव के अंजान व्यक्ति के लिये अपना समय बर्बाद कर दे, ऐसा देखने में जल्द आता नहीं है किन्तु एक वाकया ऐसा ही है उस आईआरएस अफसर की सहृदयता और मानवता के कारण एक परिवार में खुशी तो एक व्यक्ति की जान बच गयी। इस वाकये का सिलसिला शुरू होता है पड़ोसी देश बांग्लादेश से।
राजेश मिश्रा नाम का एक विक्षिप्त युवक बांग्लादेश की सीमा पार करते वक्त उसे वहाँ के सुरक्षाबल ने पकड़ा और यहाँ की बीएसएफ को सौंप दिया।
बता दें कि पश्चिम बंगाल का मालदा गाँव जो बांग्लादेश से सीमा बनाता है वहाँ इसी दो-तीन अप्रैल को बाँदा के ही राजेश मिश्रा को सीमा पार करते वक्त बांग्लादेश के सुरक्षाबल ने पकड़ कर यहाँ के बीएसएफ को सौंप दिया। बीएसएफ के कमांडेंट लोकेश सिंह जो कि मध्य प्रदेश मुरैना से हैं वहाँ वर्तमान में नियुक्त हैं, उन्होंने उससे जानकारी हासिल करनी चाहिये किन्तु मानसिक बीमार होने की वजह से वह बाँदा ही बता पाया।
वरुण यादव, आईआरएस, असिस्टेंट कमिश्नर, गुहावटी असम
बाँदा का नाम सुनते ही कमांडेंट लोकेश सिंह के चेहरे में कुछ हलचल सी हूई और उन्होंने गुहावटी में वर्तमान में नियुक्त आईआरएस अधिकारी वरुण यादव से संपर्क किया क्योंकि श्री सिंह को मालूम था कि वरुण जी भी बाँदा से हैं चार अप्रैल की रात को ही बीएसएफ कमांडेंट ने राजेश की बात ऑफिसर वरुण से कराई। राजेश के मुँह से बाँदा की बोली सुनते ही वरुण को जरा भी देर न लगी उन्होंने श्री सिंह से कहा कि हाँ! यह वास्तव में बाँदा के ही हैं।
मिट्टी के प्रेम और मानवता ने उन्हें थकी रात में भी पूर्णतः सक्रिय कर दिया था। श्री सिंह ने कहा कि अब हम राजेश को छोड़ दे रहे हैं।
तब वरुण की सक्रियता और चतुराई ने एक संभावित अनहोनी होने से भी बचाया व एक दुःखी परिवार को उसका चिराग भी वापस कराया। बबेरू के इस लाल ने अपनी मानवता के कारण भी जिले का नाम रोशन कर दिया।
अभी दो साल पहले ही आईएएस में नाम आने के बाद अपने माँ-बाप के साथ क्षेत्र और जिले का नाम रोशन किया था और नियुक्त पाने के साथ उनकी सहृदयता और मानवता के कारण एक बार फिर से जिले और क्षेत्र का नाम रोशन हुआ। उनके पिता सत्येंद्र यादव और चाचा उदय यादव ने कहा इतनी खुशी नियुक्ति में भी नहीं थी जितनी आज। तब मान-सम्मान बढ़ाया था और आज दिल जीत लिया। वरुण ने राजेश से फोन पर कई बार जिक्र की तो बदौसा और देवखेर गाँव भी राजेश की जुबान पर आ गये।
मानसिक विक्षिप्त युवक को उसके घरवालों तक पहुँचाये बिना मेरी ड्यूटी अधूरी थी: वरुण
इतना पता लगते ही वरुण ने रात में ही बाँदा कप्तान, अतर्रा सीओ, व अतर्रा के इलाहाबाद बैंक मैनेजर विनीत व बाँदा नगलपालिका अध्यक्ष मोहन साहू को फोन लगाकर अवगत कराया और भी व्यक्तिगत जान पहचान वाले लोगों को रात में ही फोन से अवगत कराया परिजनों तक सूचना पहुँची तो उनमें खुशी की लहर दौड़ गयी क्योंकि राजेश मई 2018 से गायब था। उनके परिजन पश्चिम बंगाल के उस सीमावर्ती गाँव मालदा पहुँचें, उनके पहुँचने पर भी उनके आराम और खाने-पीने की व्यवस्था की भी गुजारिश वरुण ने वहाँ के अधिकारियों से की, जो की पूरी हुई। आज देर रात तक देवखेर गाँव के राजेश की लगभग सालभर बाद वापसी होगी।
वरुण ने अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाई उनका कहना था कि मात्र छुड़वा देना ही पर्याप्त नहीं था, युवक मानसिक विक्षिप्त था और मानव तस्कर गिरोह के निशाने पर भी था इसलिये उनके घरवालों तक पहुँचाये बिना मेरी ड्यूटी अधूरी थी।

2 COMMENTS

  1. मानवता के यह कदम अन्य लोगों के लिये भी प्रेरणा के स्रोत्र की तरह कार्य करते हैं। जिससे खुशियों का प्रसार होता है। Good job…
    Thnx..dear…varun..

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