उपभोक्ता परिषद ने कहा कि अनंतता 2 दिन पहले इंडियन स्टैंडर्ड गाइड लाइन आईएस16444 के मानक के अनुसार पावर कार्पोरेशन ने अपनी फजीहत होते देख 1 साल बाद हर फेल सेम्पल स्मार्ट मीटर की लॉट से 8-8 मीटर कुल 32 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओ के परिसर लखनऊ मेरठ वाराणसी से उतार कर सेन्ट्रल पावर रिसर्च इंस्टिट्यूट सीपीआरआई नोएडा जाँच के लिए सील्ड कर भेजे गये है। जिससे एक बार फिर स्मार्ट मीटर की पूरी परियोजना पर संकट के बदल छा गये है ! इसके साथ ही स्मार्ट मीटर कम्पनिया अपनी लॉबिंग में जुट गयी है फिलहाल, उपभोक्ता परिषद पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।
परिषद ने राज्य सरकार से मांग की है कि सरकार निष्पक्ष अपनी देखरेख में सीपीआरआई एक टीम भेजकर सेम्पल जाँच कराए अन्यथा जो लोग इसकी जाँच के लिए लगाये जा रहे पहले उनके ऊपर इन्ही स्मार्ट मीटर की रिपोर्ट दबाने के आरोप लग चुके है ऐसे में पारदर्शिता की विस्वसनीयता संकट में है !
पहले भी खुल चुका है एक मामला:
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि आज से एक साल पहले भी स्मार्ट मीटर भार जंपिंग का मामला सामने आ चुका है तब उस समय काफी हंगामा मचा था इस मामले पर ऊर्जामंत्री के निर्देश के बाद एक उचस्तरीय कमेटी बनी और कुछ सेम्पल मीटर भारत सरकार की लेबोटरी सेन्ट्रल पावर रिसर्च इंस्टिट्यूट सीपीआरआई नोएडा जाँच के लिए भेजे गये जिसमे से 4 सेम्पल स्मार्ट मीटर फेल हो गए, आरोप है कि इस मामले पर ज्यादा बवाल न मचे इसलिए रिपोर्ट दबा दी गयी थी।
निष्क्षप जांच हो: अवधेश कुमार वर्मा
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा ने कहा भार सरकार द्वारा बनाई गयी गाइड लाइन आईएस की धारा 13 के तहत सेम्पल मीटर फेल होने की दशा में उस लॉट से दोबारा 8 सेम्पल स्मार्ट मीटर पुनः सीपीआरई की लेबोटरी में जाँच के लिए भेजे जाते है उनमे से किसी भी एक मीटर में कोई भी कमी मिलने या फेल होने पर पूरी लॉट के मीटर उतारे जाते हैं और ऑर्डर भी कैंसिल किया जा सकता है ऐसे में स्मार्ट मीटर निर्माता कम्पनिया अपने मीटर को पास करने के लिए पूरी ताकत झोकेगी!
उन्होंने कहा कि यह पहले की नजीर है कि ऐसे मामलों में अनेकों बार विभाग के अभियंता मीटर निर्माता कम्पनियो के साथ अपने निजी स्वार्थ में शामिल हो जाते है और मीटर निर्माता कम्पनियो अपने को बचा लेती है पावर कार्पोरेशन में मीटर रैकेट का खेल बहुत पुराना है इससे पहले आईआईटी कानपुर द्वारा वर्ष 2012 में जिस मीटर में कमी निकाली गयी थी उस पर उस समय कार्यवाही दबा ली गयी और आज जिन 3 स्मार्ट मीटर निर्माता कम्पनिया प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगा रही उसमे से एक वही मीटर निर्माता कंपनी स्मार्ट मीटर अब लगा रही इसलिए सरकार पूरे मामले पर पावर कार्पोरेशन व बिजली अभियंताओ को अलग रख कर पूरी जाँच सम्पादित कराए जिससे पूरा मामला जनता के सामने खुलकर आए।







