निजीकरण की बात जनता के साथ धोखा: उपभोक्ता परिषद

0
357

उपभोक्ता परिषद ने जारी एक प्रेससनोट में कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में देश के नामी गिरामी निजीघराने लगे है परिषद ने कहा कि पूर्वांचल के वित्तीय मानको और तकनीकी पहलुओ का अध्यन किया तो गया तो चौकाने वाला मामला सामने आया। प्रदेश में जुलाई 2020 तक कुल विद्युत उपभोक्ताओ की संख्या लगभग 2 करोड़ 85 लाख है जिसमे प्रदेश की पांचो बिजली कम्पनियो में सबसे ज्यादा उपभोक्ता पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में सबसे ज्यादा 81 लाख विद्युत उपभोक्ता है और सबसे ज्यादा सुधार की गुंजाईश पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में है।

परिषद ने कहा कि एक सबसे बड़ा सवाल यह उठना लाजमी है कि पावर कार्पोरेशन द्वारा विगत फरवरी 2020 में विद्युत नियामक आयोग में सभी बिजली कम्पनियों का 5 वर्ष का वर्ष 2020-21 से लेकर वर्ष 2024-25 तक बिजनेस प्लान फाइल किया है जिसमे 5 वर्षो में वितरण हानिया 15 प्रतिशत तक लाने के लिए होने वाले प्लान पर अलग अलग सालो का कैपिटल कॉस्ट वा प्रस्तावित खर्च सौपा है। जिसमें कहा है पूर्वांचल विद्युत वितरण में सुधार के वयापक कार्यक्रम चलाए जा रहे है जिसमे अंडर ग्राउंड केबलिंग, स्मार्ट मीटरिंग ऑडिट सीटीपीटी कृषि फीडर, फीडर मीटरिंग ईआरपी स्कीम प्रीपैड मीटरिंग बिजली चोरी पर अभियान प्रमुख है और इसमे से अनेको काम शुरू हो गये है और उस पर पूरे पांच साल में 8 हजार 801 करोड़ रुपया खर्च होना है जिसमे 7 हजार 126 करोड़ केंद्रीय सेक्टर से अनुदान है । ऐसे में जब करोड़ो खर्च हो रहा फिर पूर्वांचल केा उधोगपतियो को देने की तैयारी क्यों ? वास्तव में सरकार को सुधार करने के लिए अभियंता कार्मिको की जबाब देही तय करने के साथ उन् पर पैनी नजर रखना चाहिए और उन्ही पर सुधार की जिम्मेदारी देना चाहिए।

बिजनेस प्लान में पांच सालो में हर साल एक कैपिटल खर्च अनुमानित करते हुए जो अलग अलग सालो में सुधार के बाद वितरण हनिया प्रस्तावित है वह निम्न है:

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पावर कार्पोरेशन ने अलग अलग बिजली कम्पनियों का जो बिजनेस प्लान सौपा है जिसमे पूर्वांचल भी शामिल है उसके जिन पैरामीटरों व मानको पर बिजनेस प्लान बनाकर काम करने के प्रस्ताव आयोग को सौपा गया है यदि उसको सख्ती से पारदर्शी नीति के तहत लागु करा दिया जाय तो स्वता वयापक सुधार हो सकता है जबाब देही तय करके बिजली क्षेत्र में सुधार की वयापक संभावना है और पूर्वांचल एक ऐसी कंपनी है जहा पर अच्छा राजस्व प्राप्त किया जा सकता है।

पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने शायद बिजनेस प्लान को आयोग में फाइल तो कर दिया लेकिन ठीक से पढ़ा नहीं उसमे बिना निजीकरण किए पूर्वांचल में सुधार किए जाने का पूरा प्लान तैयार है ऐसे में प्रदेश केें मुख्यमंत्री जी और ऊर्जामंत्री जी से उपभोक्ता परिषद मांग करती है की बिना निजीकरण कराए बिजनेस प्लान को लागु कराकर जबाब देही तय करके सुधार के क्षेत्र में आगे सोचा जाय।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here