प्रधानमंत्री पद छोड़ें मोदी: राहुल गाँधी

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भाजपा का आरोप: गांधी परिवार में ‘मिडिलमैन’ संस्कृति 
 

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2018: एक बार फिर राफेल डील पर फ्रांसीसी वेबसाइट मीडियापार्ट की रिपोर्ट के आधार पर राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधा, रिपोर्ट में कहा गया है कि सौदे के लिए एक खास निजी कंपनी का होना ‘अनिवार्य व बाध्यकारी’ शर्त थी।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि देश के प्रधानमंत्री भ्रष्टाचारी हैं। वह रक्षा सौदे में हुए भ्रष्टाचार में सीधे तौर पर लिप्त हैं। इसलिए उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। गांधी ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, राफेल खरीद में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। संसद की संयुक्त समिति से इसकी जांच कराई जानी चाहिए। जांच से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। इस में प्रधानमंत्री ने सीधे-सीधे भ्रष्टाचार किया है और उनकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होने कहा, हर बात पर बोलने वाले प्रधानमंत्री इस संवेदनशील मुद्दे पर मौन क्यों साधे हैं।

भाजपा ने राहुल गांधी के परिवार को बताया ‘मिडिलमैन’ का परिवार:

उधर भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के परिवार को ‘मिडिलमैन’ का परिवार बताते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि गांधी परिवार उच्चतम न्यायालय, वायुसेना प्रमुख और देश के संस्थानों पर विश्वास नहीं करता है तथा झूठ के सहारे अपनी राजनीति चमकाने एवं देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने में लगा है।

भाजपा प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने राहुल गांधी को ‘विदूषक राजा’ का विशेषण देते हुए कहा, बचपन से राहुल ने ‘मिडिलमैन’ की संस्कृति देखी है, इसलिए वह उससे बाहर नहीं आ पा रहे हैं।

उन्होंने राहुल को चुनौती दी कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भ्रष्टाचार का आरोप साबित करने के लिए उच्चतम न्यायालय जाएं। उन्होंने कहा कि राहुल कभी केन्द्रीय सतर्कता आयोग जाते हैं और कभी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक जाते हैं पर आखिर वह उच्चतम न्यायालय क्यों नहीं जाते।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के एक सहयोगी ने अदालत में जनहित याचिका डाली थी, लेकिन पार्टी के इशारे पर उसे वापस ले लिया गया। उन्होंने कहा कि राहुल झूठ और फरेब पर राजनीति की इमारत बनाने की कोशिश कर रहे हैं। शीर्ष कोर्ट में कांग्रेस के लोगों ने एक पीआईएल यानी ‘राजनीतिक हित याचिका’ डाली थी, जिसमें सरकार को राफेल सौदा रद्द करने और उसकी कीमत के विवरण देने का निर्देश देने की दो मांगें की गई थीं, लेकिन कोर्ट ने दोनों ही निर्देश नहीं दिये।

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