सौंप दिया सारा जीवन, साईंनाथ तुम्हारे चरणों में !
अब जीत तुम्हारे चरणों में, अब हार तुम्हारे चरणों में !!
मैं जग में रहूं तो ऐसे रहूं, ज्यों जल में कमल का फूल रहे !
मेरे अवगुण दोष समर्पित हों, हे नाथ तुम्हारे चरणो में !!

मेरा निश्चय है बस एक यही, इक बार तुम्हें मैं पा जाऊं !
अर्पित कर दूं दुनियाभर का सब प्यार तुम्हारे चरणों में !!
जब-जब मानव का जन्म मिले, तब-तब चरणों का पुजारी बनूं !
इस सेवक की एक-एक रग का हो तार तुम्हारे हाथ में !!
मुझमें तुमसें भेद यही, मैं नर हूं, तुम नारायण हो !
मैं हूँ संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे चरणों में !!







